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रविवार, 5 अप्रैल 2020

ग़ज़ल :- न देखू तुझको तो दुनिया सनम बेकार सी लगती - सना

न देखू तुझको तो दुनिया सनम बेकार सी लगती 
गुलो की खुशबू झुठी और कलिया खार सी लगती l 

तेरी आँखे जताती हैं मोहब्ब्त मुझ पे ऎ हमदम
खमोशी तेरे होंठों की मुझे इजहार सी लगती  l 

चले आओ न तड़पाओ बुलाता ये हसी मन्जर 
तुम्हारे बिन ये राहे तो मुझे मझधार सी लगती l 

हमारी रह गुजर से जो गुजरते हो कभी जब तुम 
महक उठता है कूचा तब गली गुलजार सी लगती l 

सना पढ़ती है जब तुमको तुम्हारे प्यार में खोकर 
तुम्हारी ज़ात मुझको एक दम अखबार सी लगती l 

सना परवीन
हरदोई

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