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बुधवार, 16 सितंबर 2020

2:42 am

लुग़ात-ए-फ़िक्री: वो अनूठा ‘शब्दकोश’ जो लफ़्ज़ों का कुछ अलग ही अर्थ बताता है

फ़िक्र नामा, fikr nama, फ़िक्र तोनस्वी, fikr taunsvi


फ़िक्र तोनस्वी, जिनका अस्ल नाम राम लाल भाटिया था, उर्दू के विख्यात हास्य और व्यंग्य लेखक थे। 12 सितंबर 1987 को उनका निधन हुआ। फ़िक्र अपनी दीगर मज़ाहिया तहरीरों के साथ अपने अख़बारी कॉलम ‘प्याज़ के छिलके’ और विभाजन के समय के क़तल-ओ-ख़ून की रूदाद पर मुश्तमिल किताब ‘छटा दरिया’ के लिए जाने जाते हैं।

नीचे पेश की गई तहरीर फ़िक्र तोनस्वी की किताब ‘फ़िक्र-नामा’ से ली गई है। आप इसे पढ़ें, लुत्फ़-अंदोज़ हों, कुछ सीख हासिल करें और अगर किसी शब्द के बारे में आपका कोई ज़ाती ख़्याल हो तो कमेंट बॉक्स में लिख कर हमारे साथ साझा करें।

लुग़ात-ए-फ़िक्री

इलेक्शन: एक दंगल जो वोटरों और लीडरों के दरमियान होता है और जिसमें लीडर जीत जाते हैं, वोटर हार जाते हैं।

वोट: चियूंटी के पर, जो बरसात के मौसम में निकल आते हैं।

वोटर: आँख से गिर कर मिट्टी में रुला हुआ आँसू जिसे इलेक्शन के दौरान मोती समझ कर उठा लिया जाता है और इलेक्शन के बाद फिर मिट्टी में मिला दिया जाता है।

वोटर लिस्ट: जौहरी की दुकान पर लटकी हुई मोतियों की लड़ियाँ।

उम्मीदवार: बड़े-बड़े अक़लमंदों को भी बेवक़ूफ़ बनाने वाला अक़लमंद।

चुनावी  सभा: एक तम्बूरा जिस पर बेसुरे गाने गाये जाते हैं।

चुनावी घोषणापत्र: जिसमें बाद में तोड़ने के लिए वादे किए जाते हैं।

चुनावी भाषण: इलेक्शन के जंगल में गीडड़ों का नग़मा कि ‘मेरा बाप बादशाह था।’

चुनावी झण्डे: रंगा-रंग पतंगों की दुकान।

चुनावी पोस्टर: उम्मीदवार का शजरा-ए-नसब। उसके ख़ानदान की मुकम्मल तारीख़।

पोलिंग एजेंट: उम्मीदवार का चमचा।

इलेक्शन का ख़र्चा: जूए पर लगाई हुई नक़दी।

Fikr Taunsvi, Ram Lal Bhatia
फ़िक्र तोनस्वी, जिनका अस्ल नाम राम लाल भाटिया था, उर्दू के विख्यात हास्य और व्यंग्य लेखक थे।

महबूबा: एक क़िस्म की गै़र-क़ानूनी बीवी।

बीवी: महबूबा का अंजाम।

इश्क़: ख़ुदकुशी करने से पहले की हालत।

रिश्तेदार: एक रस्सी जो टूट कर भी सिर पर लटकती रहती है।

दिल्ली: जहाँ मकान बड़े हैं इन्सान छोटे।

बंबई: एक मंदिर जहाँ से भगवान निकल गया है।

साईकिल: क्लर्क बाबू की दूसरी बीवी।

क्लर्क: एक गीदड़ जो शेर का जामा पहन कर कुर्सी पर बैठता है।

बूढ़े: दीवालिया दुकान के बाहर लटका हुआ पुराना साइनबोर्ड।

अवाम: चौपाल पर रखा हुआ एक हुक़्क़ा जिसे हर राहगीर आकर पीता है।

बीवी: महबूबा की बिगड़ी हुई शक्ल।

ख़ुदा: वहम और हक़ीक़त के दरमियान डोलता हुआ पेन्डुलम।

बेरोज़गारी: इज़्ज़त हासिल करने से पहले बेइज़्ज़ती का तजुर्बा।

क्रप्शन: एक ज़हर जिसे शहद की तरह मज़े ले-ले कर चाटा जाता है।

सियासत: पैसे वालों की अय्याशी और बिन पैसे वालों के गले का ढोल।

बीवी: एक लतीफ़ा जो बार-बार दोहराने से बासी हो जाता है।

सच्चाई: एक चोर जो डर के मारे बाहर नहीं निकलता।

झूट: एक फल जो देखने में हसीन है। खाने में लज़ीज़ है। लेकिन जिसे हज़म करना मुश्किल है।

लोकतंत्र: एक मंदिर जहां भगत लोग चढ़ावा चढ़ाते हैं और पुजारी खा जाते हैं।

सूद: दूसरों का भला करने के लिए एक बुराई।

ग़रीबी: एक कश्कोल जिसमें अमीर लोग पैसे फेंक कर अपने गुनाहों की तादाद कम करते हैं।

शायर: एक परिंदा जो उम्र-भर अपना गुम-शुदा (खोया हुआ) आशियाना ढूंढता रहता है।

लीडर: दूसरों के खेत में अपना बीज डाल कर फ़सल उगाने और बेच खाने वाला।

क़ब्रिस्तान: मुर्दा इन्सानों का हाल ) वर्तमान(, ज़िंदा इन्सानों का मुस्तक़बिल (भविष्य)।

उम्मीद: एक फूल जो कभी बंजर ज़मीन को ज़रख़ेज़ बना देता है और कभी ज़रख़ेज़ ज़मीन को बंजर।

ये तहरीर फ़िक्र तोनस्वी की किताब ‘फ़िक्र-नामा’ से ली गई है।

ख़ुशामद: कमज़ोर की ताक़त और ताक़तवर की कमज़ोरी।

शराफ़त: एक ऐनक जिसे अंधे लगाते हैं।

तालीम: अनपढ़ लोगों को बेवक़ूफ़ बनाने का हथियार।

बहादुर: आग को पानी समझ कर पी जाने वाला कम-इल्म।

अंधेरा: शैतान का घर जिसे ख़ुदा अपने हाथ से तामीर करता है।

रसोई घर: गृहस्ती औरतों की राजधानी।

गृहस्ती औरत: गृहस्ती मर्द की गाड़ी का पैट्रोल पंप।

महल: झोंपड़ी के मुक़ाबले पर खींची हुई बड़ी लकीर।

छात्र: एक प्यासा जिसे समुंद्र में धक्का दे दिया जाता है और वो उम्र-भर डुबकियाँ खाता रहता है।

जेब-कतरा: एक शरारती छोकरा जो दूसरों की साईकिल में पिन चुभोकर उस की हवा निकाल देता है और भाग जाता है।

सड़क: एक रास्ता जो जन्नत को भी जाता है और जहन्नुम को भी।

जन्नत: एक ख़्वाब।

जहन्नुम: इस ख़्वाब की ताबीर।

पैसा: एक छिपकली जो इन्सान के मुँह में आ गई है। और अब उसे खाए तो कोढ़ी, छोड़े तो कलंकी।

दरिया: जिसके किनारे घर बनाओ तो उसे जोश आ जाता है और घर को बहा ले जाता है। लेकिन अगर इसमें डूबने के लिए जाओ तो हमेशा सूखा मिलता है।

ख़ुदकुशी: जायज़ चीज़ का नाजायज़ इस्तिमाल।

कुर्सी: जिस पर बैठ कर अक़लमंद आदमी बेवक़ूफ़ बन जाता है।

नेकी: जिसे पहले ज़माने में लोग दरिया में डाल देते थे। आजकल मंडी में बराए फ़रोख़्त (बेचने के लिए) भेज देते हैं।

अख़बार: एक फल जो सुकून के लिए खाया जाता है। मगर खाते ही बेचैनी पैदा कर देता है।

मय-गुसार (शराबी): रात का शहंशाह, सुबह का फ़क़ीर।

तवाइफ़: डिस्पोज़ल का माल जिसे औने-पौने दाम पर नीलाम कर के बेच दिया जाता है।

ख़ुदा: इन्सान की वो कमज़ोरी जिससे वो ताक़त हासिल करता है।

मेहमान: जिसके आने पर ख़ुशी और जाने पर और ज़्यादा ख़ुशी होती है।

ड़ॉक्टर: जो बीमारों से हंस-हंस कर बातें करता है मगर तंदरुस्तों को देखकर मुँह फेर लेता है।

जज: इन्साफ़ करने में आज़ाद मगर क़ानून का ग़ुलाम।

गवाह: झूट और सच्च के दरमियान लटकता हुआ पेन्डुलम।

कोशिश: अंधेरे में तीर चलाना। लग जाये तो वाह वाह, चूक जाये तो आह आह।

अंधेरा: बिजली कंपनी का सिर दर्द।

बिजली: चोरों का सिर दर्द।

चोर: एक जेब का माल दूसरी जेब में मुंतक़िल करने वाला आर्टिस्ट।

अंजान: जो वो चीज़ें ना जानता हो, जिन्हें जानने से दुख पैदा होते हैं।

उस्ताद: बेवक़ूफ़ों को अक़लमंद बनाकर अपने दुश्मन बनाने वाला बेवक़ूफ़।

कूड़ा कर्कट: इस्तेमाल शूदा चीज़ों का जनाज़ा।

कमज़ोरी: एक मुर्दा जिस पर ज़िंदा लोग हमला कर देते हैं और बड़े ख़ुश होते हैं।

क़त्ल: आँखों वालों की अंधी हरकत।

मकान: चिड़ियों, मक्खियों और इन्सानों का मुश्तर्का (साझा) रैन-बसेरा।

मुफ़्लिस: जो अगर मौजूद ना हो तो अहल-ए-दौलत ख़ुदकुशी कर लें।

लफ़्ज़: जो मुँह से अदा हो जाए तो बाहर जंग छिड़ जाये, अदा ना हो सके तो अंदर जंग छिड़ जाये।

मरीज़: जिसके बलबूते पर दुनिया-भर की मेडिकल कंपनियाँ चलती हैं।

क़ब्रिस्तान: लाशों का सोशलिस्ट स्टेट।

बदसूरत औरत: हसीनाओं को परखने का आला।

आदम: ख़ुदा की वो ग़लती जिसे वो आज तक ठीक नहीं कर सका।

ग़लती: माफ़ कर देने वालों के लिए एक नादिर (दुर्लभ) मौक़ा।

सरमाया-दार (पूंजीवादी): दूसरों की कतरनों से अपने लिए पतलून तैयार करने वाला एक माहिर टेलर मास्टर।

अमन: वह्शी लोगों की नींद का ज़माना।

बकरी: जिसकी अक़्ल ज़्यादा है दूध कम।

नंगा: टेक्सटाइल मिलों का मज़ाक़ उड़ाने वाला।

मक़रूज़: एक शहंशाह जो दूसरों की कमाई पर ऐश करता है।

हुकूमत: काँटों का ताज जिसे हर गंजा पहनना चाहता है।

अक़्ल: मुहब्बत और ख़ुलूस का क़ब्रिस्तान।

बेवक़ूफ़ी: एक ख़ज़ाना जो कभी ख़ाली नहीं होता।

विवाह: इश्क़ का अंजाम, बच्चों का आग़ाज़।

दिल: एक क़ब्र जिसके नीचे अक्सर ज़िंदा मुर्दे दफ़न कर दिए जाते हैं।

दिमाग़: शैतान और ख़ुदा दोनों का मुश्तरका (साझे का) घर।

पाँव: जो दूसरों को ठोकर मारता है, ख़ुद ठोकर खाता है।

काग़ज़: कोरा हो तो बे-ज़रर, लिखा जाये तो ज़रर-रसाँ।

ख़ुश-क़िस्मत: एक लाठी जो जिसके हाथ लग जाये उसी की हो जाती है।

विदेशी क़र्ज़: एक डायन जो बच्चे पैदा करती है, उन्हें खिलाती और पालती-पोस्ती है। और फिर ख़ुद ही उन्हें खा जाती है।

हिल स्टेशन: सेहत-मंद मरीज़ों का अस्पताल।

सोमवार, 24 अगस्त 2020

6:39 pm

पाखी पब्लिशिंग हाउस' द्वारा पुस्तकाकार लाया जाएगा

 सूचनार्थ : 

#देश_विशेषांक एवं #पुरस्कार_योजना


'पाखी' का दिसम्बर अंक 2020 'देश' नामक संस्था को केंद्र बिंदु बनाते हुए लिखी गई नई कहानियों, कविताओं, गीत, ग़ज़ल , निबंध, लेख आदि पर केंद्रित विशेषांक होगा। सभी नवोदित एवं वरिष्ठ रचनाकारों से आग्रह है कि मौजू समय में सर्वाधिक ज्वलंत हो उठे विषय 'देश विशेष' पर अपनी रचनाएं भेजें।


इस अंक में प्रकाशित सभी सामग्री को 'पाखी पब्लिशिंग हाउस' द्वारा पुस्तकाकार लाया जाएगा तथा सर्वश्रेष्ठ तीन रचनाओं पर क्रमशः प्रथम पुरस्कार 21 हजार, द्वितीय  11 हजार एवं तृतीय 5 हजार रुपये सम्मान धनराशि होगी। साथ ही नए लेखकों के लिए यानी ऐसे लेखक जिनकी बीज रचना होगी, दो सांत्वना पुरस्कार 2100 रुपयों की धनराशि के होंगे।


रचनाएं भेजें - pakhimagazine@gmail.com

संपादक के नाम चिट्ठी लिखें - editor@pakhi.in

संपर्क हेतु: 

फोन : 0120- 4692200

व्हाट्सएप - 7860920421


(पाखी के ऑफिसियल पेज से)


मंगलवार, 11 अगस्त 2020

5:33 pm

राहत इंदौरी सहाब आपने ही कहा था। बुलाती है मगर जाने का नही औऱ खुद चल दिये..

शायरी के एक युग का अंत हो गया 😭 भावभीनी शायरी के एक युग का अंत हो गया 😭 भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
✨स्वर्गीय राहत इंदौरी जी श्रद्धांजलि अर्पित💐💐
✨ इंदौर के रहने वाले मशहूर शायर राहत इंदौरी का मंगलवार की शाम को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वो 70 साल के थे। सोमवार को ही उन्हें इलाज के लिए अरविंदो अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। राहत इंदौरी बॉलीवुड गीतकार और उर्दू भाषा के मशहूर कवि थे। वो उर्दू भाषा के पूर्व प्रोफेसर और चित्रकार भी रहे।
  ✨हम आपको बताएंगे राहत कुरैशी के राहत इंदौरी बनने और देश दुनिया में नाम कमाने की पूरी कहानी। साथ ही राहत इंदौरी के जीवन से जुड़ी हर खास जानकारी।उनका जन्म 1 जनवरी 1950 को इंदौर में हुआ था। उनका पूरा नाम राहत कुरैशी था। उनके पिता का नाम रफतुल्लाह कुरैशी और मॉ का नाम मकबूल उन निसा बेगम है। वो इनकी चौथी संतान थे। उनकी 2 बड़ी बहनें हैं जिनका नाम तकीरेब और तहज़ीब है। उनका एक बड़ा भाई है जिसका नाम एक्विल और एक छोटा भाई है जिसका नाम आदिल है। 
उनकी शिक्षा दीक्षा भी मध्य प्रदेश में ही हुई थी। ✨आरंभिक शिक्षा देवास और इंदौर के नूतन स्कूल से प्राप्त करने के बाद इंदौर विश्वविद्यालय से उर्दू में एम.ए. और उर्दू मुशायरा शीर्षक से पीएच.डी. की डिग्री हासिल की। उसके बाद 16 वर्षों तक इंदौर विश्वविदायालय में उर्दू साहित्य के अध्यापक के तौर पर अपनी सेवाएं दी और त्रैमासिक पत्रिका शाखें का 10 वर्षों तक संपादन किया। पिछले 40-45 वर्षों से राहत साहब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मुशायरों की शान बने हुए थे।

 ✨राहत इंदौरी उर्फ राहत कुरैशी ने दो शादियां की थी। उन्होंने पहली शादी 27 मई 1986 को सीमा रहत से की। सीमा से उनको एक बेटी शिबिल और 2 बेटे जिनका नाम फैज़ल और सतलज राहत है, हुए हैं। ✨उन्होंने दूसरी शादी अंजुम रहबर से साल 1988 में की थी। अंजुम से उनको एक पुत्र हुआ, कुछ सालों के बाद इन दोनों में तलाक हो गया था।राहत इंदौरी के शायर बनने की कहानी भी दिलचस्प है।
 वो अपने स्कूली दिनों में सड़कों पर साइन बोर्ड लिखने का काम करते थे। बताया जाता है कि उनकी लिखावट काफी सुंदर थी। वो अपनी लिखावट से ही किसी का भी दिल जीत लेते थे लेकिन तकदीर ने तो उनका शायर बनना मुकर्रर किया हुआ था। ✨एक मुशायरे के दौरान उनकी मुलाकात मशहूर शायर जां निसार अख्तर से हुई। बताया जाता है कि ऑटोग्राफ लेते वक्त राहत इंदौरी ने खुद को शायर बनने की इच्छा उनके सामने जाहिर की। तब अख्तर साहब ने कहा कि पहले 5 हजार शेर जुबानी याद कर लें फिर वो शायरी खुद ब खुद लिखने लगेंगे।

 तब राहत इंदौरी ने जबाव दिया कि 5 हजार शेर तो मुझे पहले से ही याद है। इस पर अख्तर साहब ने जवाब दिया कि फिर तो तुम पहले से ही शायर हो, देर किस बात की है स्टेज संभाला करो। उसके बाद राहत इंदौरी इंदौर के आस पास के इलाकों की महफिलों में अपनी शायरी का जलवा बिखेरने लगे। धीरे-धीरे वो एक ऐसे शायर बन गए जो अपनी बात अपने शेरों के जरिए इस कदर रखते हैं कि उन्हें नजरअंदाज करना नामुमकिन हो जाता।
 राहत इंदौरी की शायरी में जीवन के हर पहलू पर उनकी कलम का जादू देखने को मिलता था। बात चाहे दोस्ती की हो या प्रेम की या फिर रिश्तों की, राहत इंदौरी की कलम हर क्षेत्र में जमकर चलती थी।शायरी लिखने से पहले वह एक चित्रकार बनना चाहते थे और जिसके लिए उन्होंने व्यावसायिक स्तर पर पेंटिंग करना भी शुरू कर दिया था। 
इस दौरान वह बॉलीवुड फिल्म के पोस्टर और बैनर को चित्रित करते थे। यही नहीं, वह पुस्तकों के कवर को डिजाइन करते थे। उनके गीतों को 11 से अधिक ब्लॉकबस्टर बॉलीवुड फिल्मों में इस्तेमाल किया गया। जिसमें से मुन्ना भाई एमबीबीएस एक है। वह एक सरल और स्पष्ट भाषा में कविता लिखते थे। वह अपनी शायरी की नज़्मों को एक खास शैली में प्रस्तुत करते थे, इसलिए उनकी अलग ही पहचान थी।

 संकलनकर्ता!!!
💞साजिद इकबाल 
      राष्ट्रीय अध्यक्ष 
जी.डी फाउंडेशन लखनऊ ,भारत
7033066062

रविवार, 28 जून 2020

11:49 pm

फिल्म - बुलबुल दो शब्द

फ़िल्म का नाम है bulbhul(बुलबुल)। इसे देखकर अगर मैं दो शब्दों की इसकी व्याख्या करूँ तो मैं इसे "हृदय विदारक" कहूंगी ।
एक बंगाली बच्ची जो बड़ी बहू बनकर ठाकुरों की हवेली में आती है और इस कदर दर्द भरा जीवन जीती है जिसे देखकर "मैली इच्छाएं" कहानी की याद आ गयी ।
एक वयस्क कहानी जो मैंने कुछ महीनों पहले लिखी और किंडल में डाली थी ।
उसकी राजकिशोरी और इसकी बुलबुल एक जैसे ही तो हैं ।
बुलबुल के चेहरे पर सदा मुस्कान चिपकी रहती है और आँखो में दिखता है मुस्कान के पीछे छिपा अथाह दर्द जिसे सत्या( नायक) बुलबुल का देवर , समझ ही नहीं पाता ।
इसमे एक दूसरी बच्ची अपने बाप की मौत पर कहती है " काली मां ने मारा है " ।
चुड़ैल ने नहीं ।
दिल को झझकोर देने वाला कथन था ।
चांद का लाल होना कहानी की जान है और फ़िल्म में नायिका का किरदार 100 में से 101 का हकदार है । वैसे मुझे उसमे(नायिका में ) श्रद्धा कपूर की छवि लगी ।
बड़ी हवेली के बड़े राज दफन रखने वाली कहानी है । देखना न देखना आपकी इच्छा है । ❤️❤️❤️

सुरभी सहगल 

मंगलवार, 28 अप्रैल 2020

10:37 am

ऑनलाइन भव्य वीडियो कवि सम्मेलन

*विशेष सूचना*

घर पर रहें_सुरक्षित रहें_कोरोना_19_जानलेवा है
ऑनलाइन भव्य वीडियो कवि सम्मेलन

दिनांक~ 10 मई 2020
विषय - मातृ दिवस
समय~ सायं 7 बजे से
स्थान~ काव्य गंगा प्रतिभा निखार मंच
संचालक~ आ. विकास भारद्वाज
सरस्वती वंदना ~
स्वागतगीत~

*ऑनलाइन भव्य वीडियो कवि सम्मेलन *

*1-वीडियो रिकार्डिंग निम्नतम समय सीमा ~5 मिनट तथा माँ पर ही काव्यपाठ की वीडियो भेजें तथा वीडियों भेजने से पहले एक बार संयोजक महोदय से जरूर सम्पर्क करें*

*2-एक फोटो, संक्षिप्त परिचय  ,वीडियो प्रतिभाग हेतु सर्वप्रथम आवश्यक |*

*3- प्रतिभागी द्वारा वीडियो 5 मई तक संयोजक महोदय को उपलब्ध कराना आवश्यक है।*
*6- प्रत्येक प्रतिभागी को तुलसी साहित्यिक संस्था बदायूँ की ओर से एक प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जायेगा|*
7-कार्यक्रम के बाद की वीडियो *काव्य गंगा यूटयूब चैनल* पर उपलब्ध रहेगी 

*🌺नि:शुल्क पंजीकरण की अंतिम तिथि ~05/05/2020*

शीघ्र सम्पर्क करें ~
आ. विकास भारद्वाज जी
कार्यक्रम संयोजक, काव्य गंगा प्रतिभा निखार मंच
  9627 193400

आ० पटबदन शंखधार जी
कार्यक्रम संचालक, काव्य गंगा प्रतिभा निखार मंच
9761 426234

आ० कामेश पाठक जी
कार्यक्रम अध्यक्ष,  काव्य गंगा प्रतिभा निखार मंच
9927 355912

आ० पवन शंखधार जी
सचिव , तुलसी साहित्यिक संस्था (बदायूँ)
9927 433400
🌺🙏🙏🙏🙏🙏🌺

सोमवार, 27 अप्रैल 2020

8:03 am

परशुराम जयंती के उपलक्ष्य में ऑनलाइन कवि सम्मेलन की खबर कुछ अखबार, बेब पोर्टल पर प्रकाशित

तुलसी साहित्यिक सामाजिक संस्था द्वारा ऑनलाइन कवि सम्मेलन आयोजित
बदायूं। परशुराम जयंती के उपलक्ष्य में तुलसी साहित्यिक सामाजिक संस्था के द्वारा एक ऑनलाइन कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसकी अध्यक्षता कामेश पाठक तथा सरस्वती वंदना डॉ. प्रीती हुंकार मुरादाबाद ने की। कवि सम्मेलन का संचालन ओजस्वी कवि षटवदन शंखधार ने किया। जिसमें सभी कवियों ने वीडियो के माध्यम से काव्य पाठ देर रात किया। जिसमें कवियों ने इस प्रकार काव्य पाठ किया।
शैलेन्द्र मिश्रा देव ने कहा कि युग द्रष्टा युग स्रष्टा, परसुराम की जय, शिव के अनन्य भक्त ,को मेरा प्रणाम है। मध्य प्रदेश के सुनील नागर सरगम ने कहा कि ईश्वर ने अवतार लिया है परशुराम बन कर आये। भोले नाथ को गुरु बनाया, दिव्य शस्त्र को पाये।

बदायूँ एक्सप्रेस पर
http://www.badaunexpress.com/archives/209434

विकास भारद्वाज ने कहा कि सिर पर जटा,क्रांतिदूत ने दुनिया को वीरता दिखाई। परशुराम ने भीष्म, द्रोण, कर्ण को धनुर्विद्या सिखाई। सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि कांधे पे पिनाक धारि, कर में कुठार लिए, अरि के दमन हेतु, चले भृगुनाथ हैं। मिर्जापुर से डा.कनक पाठक ने कहा कि विष्णु के कुल अवतारों में षटावतार तुम्हारा है, हे! जमदाग्निय वर दो हमको सहत्र प्रणाम हमारा है। शाहजहांपुर से प्रदीप बैरागी ने कहा कि परशुराम हैं राम के, युग सृष्टा अवतार। आकर पृथ्वी पर सकल,किया जीव उद्धार ।

यह कार्यक्रम काव्य गंगा यूटयूब चैनल पर भी उपलब्ध है :-


मुम्बई के रवि रश्मि अनुभूति ने कहा कि आज अक्षय तृतीया के दिन ही जयंती परशुराम की, क्रोध के भंडार रहे, प्यार के प्रतीक परशुराम की। संचालक षटवदन शंखधार ने कहा कि मातु रेणुका का पुत्र, वीरता का था प्रतीक, तीनों लोक नाम सुन,कांप कांप जाते थे, तीरों से था भरा हुआ,तरकश देख देख, शत्रु दल अति शीघ्र,भाव भांप जाते थे, वीर योद्धा जिस ओर, मुड जाता एक बार, दानवों के मुंड मुंड ,धूल में समाते थे, साधु जन विप्र जन,भृगु जी का नाम जप, हिय में आनंद लिए, अति सुख पाते थे।

यह खबर Sks life.in पर भी प्रकाशित है :-
http://skslife.in/?p=20923#.XqbRK4Vv7BA.whatsapp

भोपाल से नीतू राठौर ने कहा कि माता के प्रति प्रेम भाव था, मान रखा आज्ञा का पिता की जो थे पालनहार, पिता ने क्रोधवश चार पुत्रों को श्राप दिया खो देने का अपने विवेक विचार।
बंदा से प्रमोद दीक्षित मलय ने कहा कि महाकाल शिव की आराधना में रत वह। भाव भक्ति प्रबल रही निष्काम हो गया। कर में परशु गहे, कांधे शरासन सोहे। तापस धनुर्धारी परशुराम हो गया। कामेश पाठक ने कहा कि भाल पे लाल त्रिपुण्ड लसै,उर रुद्र की माल विराजत है। वायें कर मे धनुवाण सजे,दहिने कर फरशा साजत है। रस रौद्र बसे जैसे नैनन मे,बैनन रस वीर सुहावत है । दास हृदय प्रभु वास करौ,तुम्हें पाठक शीश झुकावत है। बिहार दरभंगा से विनोद कुमार ने कहा कि छठे अवतार रूप विष्णु जी का आप ही हों भीष्म द्रोण कर्ण सारे शिष्य कहलाते हैं। उज्जवल वशिष्ट ने कहा कि कलियुग में साधू संतों का जीना है दुशवार, परशुराम भगवान तुम्हारा कब होगा अवतार। 

परशुराम जयंती के उपलक्ष्य में सामाजिक संस्था के द्वारा  आनलाइन कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन - दैनिक वाडेकर टाइम्स - 

मेरठ से यतिन अधाना ने कहा कि सकल जगत की रक्षा में वो परशु धार चले रण में,अहंकार का दमन करनेप्रभु अवतार चले रण में लें। विष्णु असावा ने कहा कि प्रभु परशुराम मेरे, तुमने ही दुनिया तारी तुमने ही दुष्ट मारे, तुमने धरा उबारी।
कवि सम्मेलन में तुलसी साहित्यिक सामाजिक संस्था के अध्यक्ष अतुल कुमार श्रोत्रिये ने सबका हदय से आभार व्यक्त किया। ग्रुप में श्रोता के रूप में सीमा चौहान, हरिचंद्र सक्सेना, डां राकेश कुमार जायसवाल, कौशिक सक्सेना ने सभी की कविताओं पर सटीक विश्लेषण टिप्पणी की और उत्साह वर्धन किया। संस्था सचिव पवन शंखधार ने सभी साहित्यकारों का आभार किया।

शनिवार, 18 अप्रैल 2020

7:15 am

नज़्म कहो कि जीना नज़्म है जीने की एक और रस्म है नज़्म कहो.... गुलज़ार साहब

नज़्म कहो कि जीना नज़्म है
जीने की एक और रस्म है
नज़्म कहो....

गुलज़ार साहब

Kavita Baisakhi 2020

Nazm kaho.....

Winners will be selected by Gulzar Sir.

First prize -  30000 rs.
Second     -   20000
Third.        -   10000

 5000 rs. to seven runner up poets.

Rules....

1.      Poetry can be written in any poetic style.
         रचना किसी भी रूप में हो सकती है - शेर, नज़्म, कविता
2.      Subject – Disability
         विषय- विकलांगता
3.      Language – Hindi and Hindustani, Roman Hindi.
          भाषा - हिंदी, हिंदुस्तानी या रोमन हिंदी
4.      Word Limit – 75 (Max)
         शब्द सीमा-75
5.      A poem in its entirety must be an original work by the person entering the contest.
         रचना पूरी तरह मौलिक होनी चाहिए
6.      The title of the poem should be given by the participant.
         कविता का शीर्षक रचनाकार को ही देना होगा
7.      You may enter any number of Poems, but may only win one prize.
         एक से अधिक रचनाएँ भी स्वीकार्य होंगी पर पुरस्कार  के लिए एक ही रचना चुनी जाएगी
8.      The contest is open to any age.
         कोई आयु सीमा नहीं
8.      Any one from any part of the world can participate in this online contest.
         विश्व से कोई भी अपनी कविता भेज सकता है
9.      Last date of submission is 20th April 2020. 
         रचना भेजने  की अंतिम तिथि  20  अप्रैल  2020

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Link
https://t.co/9SzBaDw3kY

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शनिवार, 15 फ़रवरी 2020

6:54 pm

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संस्थापक :- विकास भारद्वाज
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गुरुवार, 16 जनवरी 2020

6:34 am

पत्रिकाओं के ईमेल की एक और सूची

पत्रिकाओं के ईमेल की एक और सूची इनको सेव जरूर कर लें
==================

1. हंस, संजय सहाय (संपादक), editorhans@gmail.com

2 himprasthahpGmail.com

3. बया, गौरीनाथ (संपादक), rachna4baya@gmail.com
4. पहल, ज्ञानरंजन (संपादक), edpahaljbp@yahoo.co.in, editorpahal@gmail.com
5. अंतिम जन- दीपक श्री ज्ञान (संपादक)- antimjangsds@gmail.com, 2010gsds@gmail.com
6. समयांतर- पंकज बिष्ट (संपादक)- samayantar.monthly@gmail.com, samayantar@yahoo.com
7. लमही- विजय राय (संपादक)- vijayrai.lamahi@gmail.com
8. पक्षधर- विनोद तिवारी (संपादक)- pakshdharwarta@gmail.com
9. अनहद- संतोष कुमार चतुर्वेदी (संपादक)- anahadpatrika@gmail.com
10. नया ज्ञानोदय- लीलाधर मंडलोई (संपादक)- nayagyanoday@gmail.com, bjnanpith@gmail.com
11. स्त्रीकाल, संजीव चन्दन (संपादक), themarginalized@gmail.com,
12. बहुवचन- अशोक मिश्रा (संपादक)- bahuvachan.wardha@gmail.com
13. अलाव- रामकुमार कृषक (संपादक)- alavpatrika@gmail.com
14. बनासजन- पल्लव (संपादक)- banaasjan@gmail.com
15. व्यंग्य यात्रा, प्रेम जनमेजय (संपादक), vyangya@yahoo.com, premjanmejai@gmail.com
16. अट्टहास (हास्य व्यंग्य मासिक), अनूप श्रीवास्तव (संपादक), anupsrivastavalko@gmail.com
17. उद्भावना- अजेय कुमार (संपादक)- udbhavana.ajay@yahoo.com
18. समकालीन रंगमंच- राजेश चन्द्र (सम्पादक)- samkaleenrangmanch@gmail.com
19. वीणा-राकेश शर्मा,veenapatrika@gmail.com
20. मुक्तांचल-डॉ मीरा सिन्हा,muktanchalquaterly2014@gmail.com,
21. शब्द सरोकार-डॉ हुकुमचन्द राजपाल,sanjyotima@gmail.com,
22. लहक-निर्भय देवयांश,lahakmonthly@gmail.com
23. पुस्तक संस्कृति। संपादक पंकज चतुर्वेदी।editorpustaksanskriti@gmail.com
24. प्रणाम पर्यटन हिंदी त्रैमासिक संपादक प्रदीप श्रीवास्तव लखनऊ उत्तर प्रदेश
1. PRANAMPARYATAN@YAHOO.COM
25. समालोचन वेब पत्रिका, अरुण देव (सम्पादक), www.samalochan.com, devarun72@gmail.com
26. वांग्मय पत्रिका, डॉ. एम. फ़िरोज़. एहमद, (सम्पादक), vangmaya@gmail.com
27. साहित्य समीर दस्तक (मासिक), कीर्ति श्रीवास्तव (संपादक), राजकुमार जैन राजन (प्रधान सम्पादक), licranjan2003@gmail.com
28. कथा समवेत (ष्टमासिक), डॉ. शोभनाथ शुक्ल (सम्पादक), kathasamavet.sln@gmail.com
29. अनुगुंजन (त्रैमासिक), डॉ. लवलेश दत्त (सम्पादक), sampadakanugunjan@gmail.com
30. सीमांत, डॉ. रतन कुमार (प्रधान संपादक), seemantmizoram@gmail.com
31. शोध-ऋतु, सुनील जाधव (संपादक), shodhrityu78@yahoo.com
32. विभोम स्वर, पंकज सुबीर (संपादक), vibhomswar@gmail.com, shivna.prakashan@gmail.com
33. सप्तपर्णी, अर्चना सिंह (संपादक), saptparni2014@gmail.com
34. परिकथा, parikatha.hindi@gmail.com
35. लोकचेतना वार्ता, रवि रंजन (संपादक), lokchetnawarta@gmail.com
36. युगवाणी, संजय कोथियल (संपादक), Yugwani@gmail.com
37. गगनांचल,डॉक्टर हरीश नवल (सम्पादक), sampadak.gagnanchal@gmail.com
38. अक्षर वार्ता, प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा (प्रधान संपादक), डॉ मोहन बैरागी (संपादक) aksharwartajournal@gmail.com
39. कविकुंभ, रंजीता सिंह (संपादक), kavikumbh@gmail.com
40. मनमीत, अरविंद कुमार सिंह(संपादक), manmeetazm@gmail.com
41. पू्र्वोत्तर साहित्य विमर्श (त्रैमासिक), डॉ. हरेराम पाठक (संपादक), hrpathak9@gmail.com
42. लोक विमर्श, उमाशंकर सिंह परमार (संपादक), umashankarsinghparmar@gmail.com
43. लोकोदय, बृजेश नीरज (संपादक), lokodaymagazine@gmail.com
44. माटी, नरेन्द्र पुण्डरीक (संपादक), Pundriknarendr549k@gmail.com
45. मंतव्य, हरे प्रकाश उपाध्याय (संपादक), mantavyapatrika@gmail.com
46. सबके दावेदार, पंकज गौतम (संपादक), pankajgautam806@gmail.com
47. जनभाषा, श्री ब्रजेश तिवारी (संपादक), mumbaiprantiya1935@gmail.com, drpramod519@gmail.com
48. सृजनसरिता (हिंदी त्रैमासिक), विजय कुमार पुरी (संपादक), srijansarita17@gmail.com
49. नवरंग (वार्षिकी), रामजी प्रसाद ‘भैरव’ (संपादक), navrangpatrika@gmail.com
50. किस्सा कोताह (त्रैमासिक हिंदी), ए. असफल (संपादक), a.asphal@gmail.com, Kotahkissa@gmail.com
51. सृजन सरोकार (हिंदी त्रैमासिक पत्रिका), गोपाल रंजन (संपादक), srijansarokar@gmail.com, granjan234@gmail.com
52. उर्वशी, डा राजेश श्रीवास्तव (संपादक), urvashipatrika@gmail.com
53. साखी (त्रैमासिक), सदानंद शाही (संपादक), Shakhee@gmail.com
54. गतिमान, डॉ. मनोहर अभय (संपादक), manohar.abhay03@gmail.com
55. साहित्य यात्रा, डॉ कलानाथ मिश्र (संपादक), sahityayatra@gmail.com
56. भिंसर, विजय यादव (संपादक), vijayyadav81287@gmail.com
57. सद्भावना दर्पण, गिरीश पंकज (संपादक), girishpankaj1@gmail.com
58. सृजनलोक, संतोष श्रेयांस (संपादक), srijanlok@gmail.com
59. समय मीमांसा, अभिनव प्रकाश (संपादक), editor.samaymimansa@gmail.com
60. प्रवासी जगत, डॉ. गंगाधर वानोडे (संपादक), gwanode@gmail.com pravasijagat.khsagra17@gmail.com
61. शैक्षिक उन्मेष, प्रो. बीना शर्मा (संपादक), dr.beenasharma@gmail.com
62. पल प्रतिपल, देश निर्मोही (संपादक), editorpalpratipal@gmail.com
63. समय के साखी, आरती (संपादक), samaysakhi@hmail.in
64. समकालीन भारतीय साहित्य, ब्रजेन्द्र कुमार त्रिपाठी (संपादक), secretary@sahitya-akademi.gov.in
65. शोध दिशा, डॉ गिरिराजशरण अग्रवाल (संपादक), shodhdisha@gmail.com
66. अनभै सांचा, द्वारिका प्रसाद चारुमित्र (संपादक), anbhaya.sancha@yahoo.co.in
67. आह्वान, ahwan@ahwanmag.com, ahwan.editor@gmail.com
68. राष्ट्रकिंकर, विनोद बब्बर (संपादक), rashtrakinkar@gmail.com
69. साहित्य त्रिवेणी, कुँवर वीरसिंह मार्तण्ड (संपादक), sahityatriveni@gmail.com
70. व्यंजना, डॉ रामकृष्ण शर्मा (संपादक), shivkushwaha16@gmail.com
71. एक नयी सुबह (हिंदी त्रैमासिक), डॉ. दशरथ प्रजापति (संपादक), dasharathprajapati4@gmail.com
72. समकालीन स्पंदन, धर्मेन्द्र गुप्त 'साहिल' (संपादक), samkaleen.spandan@gmail.com
73. साहित्य संवाद , संपादक - डॉ. वेदप्रकाश, sahityasamvad1@gmail.com
74. भाषा विमर्श ( अपनी भाषा की पत्रिका), अमरनाथ (प्रधान संपादक), अरुण होता (संपादक), amarnath.cu@gmail.com
75. विश्व गाथा, पंकज त्रिवेदी (संपादक), vishwagatha@gmail.com
76. भाषिकी अंतरराष्ट्रीय रिसर्च जर्नल, प्रो. रामलखन मीना (संपादक), prof.ramlakhan@gmail.com
77. समवेत, संपादक-डॉ.नवीन नंदवाना,
78-editordeskudr@gmail.com
79-hindipatahar@gmail.com

80-bajpaikailash51@gmail.com

81 बोहल शोध मंजूषा
सम्पादक डॉ नरेश सिहाग एडवोकेट
grsbohal@gmail.com






शनिवार, 4 जनवरी 2020

8:10 pm

राष्ट्रीय बाल साहित्य सम्मान 2019 हेतु बालकहानियां आमंत्रित

राष्ट्रीय बालसाहित्य सम्मान 2019 हेतु बालकहानियां आमंत्रित 
 सभी बाल साहित्यकारों से बालकहानी आमंत्रित है. बाल कहानी संदेशप्रद होनी चाहिए. मगर, संदेश या उपदेश सीधा व्यक्त न हो, इस बात का ध्यान रखते हुए दिनांक 25 फरवरी 2020 तक बाल कहानियाँ सादर आमंत्रित है.
1— बालकहानियां पशुपक्षी, जीवजंतु, मूर्तअमूर्त वस्तु के पात्र ले कर रची गई हो.
2— कहानी में सरस, सरल और सहज वाक्यों को समावेश हो, इस बात का ध्यान रखिएगा. वाक्य छोटेछोटे हो.
3— मंनोरंजक और उद्देश्यपरक कहानियों को प्राथमिकता दी जाएगी.
3— बालकहानी में कथातत्व का समावेश हो.
4— आप की सर्वश्रेष्ठ एक बालकहानी की तीन प्रतियां ए—4 आकार के कागज पर एक ओर लिख कर या टाईप करवा कर भेजे. उस में कहीं नाम,पता या कोई पहचान चिह्न अंकित न हो इस बात का ध्यान रखे. अपना संक्षिप्त परिचय व एड्रेस अलग से A-4 साइज कागज पर लिख भेजे जिसमे कहानी का शीर्षक लिखते हुए मौलिकता की घोषणा भी अंकित करें
5— इसे पंजीकृत डाक या कूरियर से — राजकुमार जैन राजन,
चित्रा प्रकाशन,
आकोला -312205 (चित्तौड़गढ़) राजस्थान
के पते पर अंतिमतिथि के पूर्व प्रेषित कर दें. ताकि समय सीमा में यह प्राप्तकर्ता को मिल सकें.
6— एक प्रति जिस में पूरा नाम, पता, मोबाइल नंबर और मेल आईडी लिखा हो. उसे
Rajkumarjainrajan@gmail.com  मेल  पर भेजे
के विषय में — राष्ट्रीय बालसाहित्य सम्मान 2019 हेतु बालकहानियां , लिख कर संलग्नक के साथ पहुंचा दे.
7- कहानी यूनीफॉण्ट या मंगलफोंट में  टाइप कर के वर्ड फ़ाईल में भेजे।
8- प्रतियोगिता में स्वीकृत और मापदंड पर खरी उतरी  बालकहानियों का एक संकलन प्रकाशित कर, उनके रचनाकारों को समारोह में स्मृति चिह्न, नगद राशि के साथ ससम्मान पुरस्कार के साथ प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार प्रथम ₹. 3100/-, द्वितीय ₹.2100/-, तृतीय ₹.1100 एवम 5 प्रोत्साहन पुरस्कार देय होंगे।

संपादक/ संयोजक
-ओमप्रकाश क्षत्रिय प्रकाश
-राजकुमार जैन राजन


सूचना साभार :- स्वैच्छिक दुनिया समाचार पत्र
12:21 am

ऊना (हिमाचल प्रदेश) में षटवदन शंखधार की कविता ने जगाई राष्ट्र भक्ति की अलख

राष्ट्रीय एकता शिविर में बदायूं से प्रतिभाग करने पहुंचे कवि षटवदन शंखधार ने *एक शाम विभिन्न प्रदेशों के नाम*
कार्यक्रम में काव्य पाठ किया तो उत्तर प्रदेश बदायूं की ओर से उनको बहुत सराहा गया |
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आईएस संदीप कुमार (जिला उपायुक्त ऊना), आईपीएस अधिकारी शालिनी अग्निहोत्री , जिला समन्वयक डॉ लाल सिंह ने बदायूं की धरती को खड़े होकर अभिवादन किया |
और कहा आज समाज में तुम जैसे लाखों युवाओं की आवश्यकता है जो समाज में अपनी संस्कृति को बढ़ावा देने का काम कर सकते हैं बदलते हुए परिवेश में जहां युवा आज नशा खोरी,चोरी , डकैती में लगा है वहीं आप जैसे लोग समाज को जागरूक करने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर रहे हैं हमें इस बात की खुशी है कि आप समाज का आदर्श बने हुए हैं 
कार्यक्रम में 15 प्रदेशो ने प्रतिभागाता की जिसमें उत्तर प्रदेश की ओर से षटवदन शंखधार ने प्रतिनिधित्व किया और उनका सम्मान भी किया गया |

शनिवार, 28 दिसंबर 2019

6:33 pm

धारावाहिक रामायण रामानन्द सागर ने उस समय इतिहास रचा जब उन्होंने टेलीविज़न धारावाहिक "रामायण" बनाया


रामानन्द सागर
रामानन्द सागर Ramanand Sagar, जन्म: 29 दिसम्बर, 1917; मृत्यु: 12 दिसम्बर, 2005) एक भारतीय फ़िल्म निर्देशक थे। रामानन्द सागर सबसे लोकप्रिय धारावाहिक 'रामायण' बनाने के लिए प्रसिद्ध हैं। इनके कैरियर की शुरुआत "राइडर्स ऑफ़ द रैलरोड" (1936) नामक फ़िल्म के साथ हुई थी।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी रामानन्द सागर का जन्म अविभाजित भारत के लाहौर ज़िले के "असलगुरु" ग्राम नामक स्थान पर 29 दिसम्बर 1927 में एक धनी परिवार में हुआ था। उन्हें अपने माता-पिता का प्यार नहीं मिला, क्योंकी उन्हें उनकी नानी ने गोद ले लिया था। पहले उनका नाम चंद्रमौली चोपड़ा था लेकिन नानी ने उनका नाम बदलकर रामानंद रख दिया।
स्रोत- गूगल 

1947 में देश विभाजन के बाद रामानन्द सागर सबकुछ छोड़कर सपरिवार भारत आ गए। उन्होंने विभाजन की जिस क्रूरतम, भयावह घटनाओं का दिग्दर्शन किया, उसे कालांतर में "और इंसान मर गया" नामक संस्मरणों के रूप में लिपिबद्ध किया। यह भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं है कि वे जब अपनी मातृभूमि से बिछुड़कर युवावस्था में शरणार्थी बन भारत आए, उनकी जेब में मात्र 5 आने थे, किन्तु साथ में था अपने धर्म और संस्कृति के प्रति असीम अनुराग-भक्तिभाव। शायद इसी का परिणाम था कि आगे चलकर उन्होंने रामायण, श्रीकृष्ण, जय गंगा मैया और जय महालक्ष्मी जैसे धार्मिक धारावाहिकों का निर्माण किया। दूरदर्शन के द्वारा प्रसारित इन धारावाहिकों ने देश के कोने-कोने में भक्ति भाव का अद्भुत वातावरण निर्मित किया।
स्रोत- गूगल 

मेधावी छात्र
16 साल की अवस्था में उनकी गद्य कविता श्रीनगर स्थित प्रताप कालेज की मैगजीन में प्रकाशित होने के लिए चुनी गई। युवा रामानंद ने दहेज लेने का विरोध किया जिसके कारण उन्हें घर से बाहर कर दिया गया। इसके साथ ही उनका जीवन संघर्ष आरंभ हो गया। उन्होंने पढ़ाई जारी रखने के लिए ट्रक क्लीनर और चपरासी की नौकरी की। वे दिन में काम करते और रात को पढ़ाई। मेधावी छात्र होने के कारण उन्हें पंजाब विश्वविद्यालय पाकिस्तान से स्वर्ण पदक मिला और फ़ारसी भाषा में निपुणता के लिए उन्हें मुंशी फ़ज़ल के ख़िताब से नवाज़ा गया। इसके बाद सागर एक पत्रकार बन गए और जल्द ही वह एक अखबार में समाचार संपादक के पद तक पहुंच गए। इसके साथ ही उनका लेखन कर्म भी चलता रहा।
स्रोत- गूगल 

सागर आर्ट कॉरपोरेशन
रामानंद सागर का झुकाव फ़िल्मों की ओर 1940 के दशक से ही था। लेकिन उन्होंने बाक़ायदा फ़िल्म जगत में उस समय एंट्री ली, जब उन्होंने राज कपूर की सुपरहिट फ़िल्म 'बरसात' के लिए स्क्रीनप्ले और कहानी लिखी। भारत के अंग्रेज़ों से स्वतंत्रता पाने के बाद वर्ष 1950 में रामानन्द सागर ने एक प्रोडक्शन कंपनी "सागर आर्ट कॉरपोरेशन" शुरू की थी और 'मेहमान' नामक फ़िल्म के द्वारा इस कंपनी की शुरुआत की। बाद में उन्होंने इंसानियत, कोहिनूर, पैगाम, आँखें, ललकार, चरस, आरज़ू, गीत और बग़ावत जैसी हिट फ़िल्में बनाईं। वर्ष 1985 में वह छोटे परदे की दुनिया में उतर गए। फिर 80 के दशक में रामायण टीवी सीरियल के साथ रामानंद सागर का नाम घर-घर में पहुँच गया।
स्रोत- गूगल 

धारावाहिक रामायण
रामानन्द सागर ने उस समय इतिहास रचा जब उन्होंने टेलीविज़न धारावाहिक "रामायण" बनाया और जो भारत में सबसे लंबे समय तक चला और बेहद प्रसिद्ध हुआ। जो भगवान राम के जीवन पर आधारित और रावण और उसकी लंका पर विजय प्राप्ति पर बना था।
स्रोत- गूगल 

निर्देशन और निर्माण
रामानन्द सागर ने कुछ फ़िल्मों तथा कई टेलीविज़न कार्यक्रमों व धारावाहिकों का निर्देशन और निर्माण किया। इनके द्वारा बनाए गए प्रसिद्ध टीवी धारावाहिकों में रामायण, कृष्णा, विक्रम बेताल, दादा-दादी की कहानियाँ, अलिफ़ लैला और जय गंगा मैया आदि बेहद प्रसिद्ध हैं। धारावाहिकों के अलावा उन्होंने आंखें, ललकार, गीत आरजू आदि अनेक सफल फ़िल्मों का निर्माण भी किया। 50 से अधिक फ़िल्मों के संवाद भी उन्होंने लिखे। कैरियर के शुरुआती दिनों में उन्होंने पत्रकारिता भी की। पत्रकार, साहित्यकार, फ़िल्म निर्माता, निर्देशक, संवाद लेखक आदि सभी का उनके व्यक्तित्व में अनूठा संगम था। और तो और, रामायण धारावाहिक की प्रत्येक कड़ी में उनके द्वारा रामचरित मानस की घटनाओं, पात्रों की भक्तिपूर्ण, सहज-सरस और मधुर व्याख्या ने उन्हें एक लोकप्रिय प्रवचनकर्ता के रूप में भी स्थापित किया।
स्रोत- गूगल 

लेखन
उन्होंने 22 छोटी कहानियां, तीन वृहत लघु कहानी, दो क्रमिक कहानियां और दो नाटक लिखे। उन्होंने इन्हें अपने तखल्लुस चोपड़ा, बेदी और कश्मीरी के नाम से लिखा लेकिन बाद में वह सागर तखल्लुस के साथ हमेशा के लिए रामानंद सागर बन गए। बाद में उन्होंने अनेक फ़िल्मों और टेलीविज़न धारावाहिकों के लिए भी पटकथाएँ लिखी
सम्मान और पुरस्कार
सन् 2001 में रामानन्द सागर को उनकी इन्हीं सेवाओं के कारण पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें फ़िल्म 'आँखें' के निर्देशन के लिए फ़िल्मफेयर पुरस्कार और 'पैग़ाम' के लिए लेखक का फ़िल्मफेयर पुरस्कार मिला।

निधन[सम्पादन
देश में शायद ही कोई ऐसा फ़िल्म निर्माता-निर्देशक हो जिसे न केवल अपने फ़िल्मी कैरियर में भारी सफलता मिली वरन् जिसे करोड़ों दर्शकों, समाज को दिशा देने वाले संतों-महात्माओं का भी अत्यंत स्नेह और आशीर्वाद मिला। डा. रामानन्द सागर ऐसे ही महनीय व्यक्तित्व के धनी थे। सारा जीवन भारतीय सिने जगत की सेवा करने वाले रामानन्द सागर शायद भारतीय फ़िल्मोद्योग के ऐसे पहले टी.वी. धारावाहिक निर्माता व निर्देशक थे, जिनके निधन की खबर सुनते ही देश के कला प्रेमियों, करोड़ों दर्शकों सहित हजारों सन्त-महात्माओं में शोक की लहर दौड़ गई। गत 12 दिसम्बर 2005 की देर रात मुंबई, महाराष्ट्र के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया। 87 वर्षीय रामानंद सागर ने तीन महीने बीमार रहने के बाद अंतिम साँस ली। जूहु के विले पार्ले स्थित शवदाह गृह में उनके बड़े पुत्र सुभाष सागर ने उनके पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी। इस अवसर पर उनके चाहने वाले सैकड़ों लोग, कलाकार, निर्माता- निर्देशक उपस्थित थे।

उनकी जनप्रियता का अन्दाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हरिद्वार में आयोजित धर्मसंसद में शोकाकुल संतों, देश के चोटी के धर्माचार्यों ने उनकी स्मृति में मौन रखा। उनके द्वारा निर्मित और निर्देशित धारावाहिक "रामायण" ने देश में अद्भुत सांस्कृतिक जागरण पैदा किया।
++++++
रामानंद की रामायण सीरियल से जुड़े कुछ रोचक तथ्य
दुनिया के लाखों टेलीविजन पर छा जाने वाले रामानन्द सागर  के धारावाहिक "रामायण" को करीब 28 साल हो चुके हैं। मशहूर निर्माता निर्देशक रामानंद सागर 1987 में दूरदर्शन पर धाराविक 'रामायण' लेकर आए। रामानंद सागर ने जब रामायण का निर्माण किया था तो वह भी नहीं जानते थे कि रामायण लोगों के जीवन का अहम हिस्सा बन जाएगा। जानिए रामानंद सागर के जन्मदिन के मौके पर रामायण से जुड़ी दिलचस्प बातें।

सात्विक रहने का एग्रीमेंट
रामानंद सागर ने सीरियल शुरू करने से पहले ही सभी कलाकारों से सात्विक खान-पान, रहन-सहन का एग्रीमेंट किया था। सीरियल पूरे चार सालों में बना और कलाकारों को इस बीच नॉनवेज, स्मोकिंग, ड्रिंकिंग या अन्य दुव्र्यसनों से दूर रहना पड़ा। जो एक्टर इनके आदी थे, उन्हें रामानंद सागर के इस नियम से खीज होती थी। चार साल बाद वही एक्टर पूरी तरह सात्विक बनकर निकले और आज भी उन्हीं नियमों पर चल रहे हैं।

जाति के आधार पर किरदार
रामानंद सागर ने सीरियल को जीवंत बनाने के लिए मुख्य पात्रों के लिए जाति के अनुरूप किरदार तय किए थे। अरुण गोविल क्षत्रिय थे तो उन्हें राम बनाया गया। रावण ब्राह्मण कुल से थे, इसलिए इसके लिए अरविंद त्रिवेदी को चुना।
रोज़मरा के काम पर लग जाता था ब्रेक
रामायण देखने के लिए आलम यह होता था कि लोग रविवार की सुबह का बडी बेसब्री से इंतजार करते थे। एक टेलीविजन सेट पर गांव और मुहल्ले के लोगों का हुजूम उमड पडता था। बस और ट्रकों के ड्राइवर अपने वाहनों को ब्रेक लगाकर रामायण देखने के लिए किसी ढाबे में लगे टेलीविजन से चिपक जाते थे।

पवित्र बन गया सीरियल
निर्माता रामानंद सागर को एक महिला ने चिट्ठी लिखी कि जब भी 'रामायण' टी.वी. पर आता है, तो वह अपने अंधे बेटे को टी.वी. छूने को कहती है, इस विश्वास से कि उसकी आँखों की रोशनी लौट आएगी। यह सीरियल 'रामायण ग्रंथ' जैसा पवित्र माना जाने लगा।

विक्रम बना राम
टीवी पर इससे पहले रामानंद सागर 'विक्रम और बेताल' नाम का एक धाराविहक बना चुके थे। इसमें विक्रमादित्य की भूमिका निभाने वाले अरुण गोविल को उन्होंने 'रामायण' में राम के केंद्रीय पात्र के रूप में चुना।

सड़के और बस सुनसान
रामायण जब अपने लोकप्रियता के चरम पर था तो कहा जाता है कि प्रसारण के समय पूरा देश मानो रूक कर केवल रामायण देखता था। सड़कों पर बस नहीं चला करती थी क्योंकि उसके यात्री टीवी के सामने बैठकर रामायण देख रहे होते थे।

9:30 बन गया सबसे हिट
'रामायण' टीवी पर आने वाला ऐसा इकलौता धारावाहिक बना जिसे 45 मिनट का टीवी स्लॉट मिला। जबकि उन दिनों दूरदर्शन पर सिर्फ आधे घंटे और एक घंटे के स्लॉट ही कार्यक्रमों को मिला करते थे। दूरदर्शन ने रामानंद सागर को जब रविवार सुबह 9:30 बजे का टाइम दिया तो यह स्लॉट टीवी उद्योग में कम लोकप्रिय समय में गिना जाता था लेकिन रामायण के हिट होने के बाद इस स्लॉट को सबसे हिट स्लॉट के रूप में देखा जाता है।
निर्माताओं ने कहा था फ्लॉप
निर्देशक रामानंद सागर, रामायण बनाने का प्रस्ताव लेकर जिस भी निर्माता के पास गए उसने उन्हें वापसी का रास्ता दिखा दिया। टीवी के लिए 'रामायण' बनाने का सौदा किसी को फ़ायदा का नहीं लगा। इसपर पैसा लगाने से पैसा डूब जाएगा। हालांकि हुआ ठीक इसका उल्टा रामानंद सागर ने अपने ही प्रोडक्‍शन हाउस सागर आर्ट्स के बैनर तले इसका निर्माण किया ।

कमाई में अव्वल
एक अनुमान के मुताबिक रामायण के एक एपिसोड को बनाने का खर्च लगभग 1 लाख रुपये के आसपास था जो उस समय बहुत ज्यादा था। यह भारतीय टीवी इतिहास की सबसे कमाई करने वाली सीरियल में से एक है।

स्रोत- गूगल 

बुधवार, 25 दिसंबर 2019

5:40 am

सभी गीतकार बन्धुओं को सूचित करते हुए अपार हर्ष

सभी गीतकार बन्धुओं को सूचित करते हुए अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है कि आदर्श सेवा संस्थानम् के तत्त्वावधान में 'राष्ट्रिय युवा गीत लेखन प्रतियोगिता' का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें प्रथम पुरस्कार विजेता को ₹ ५१००/-, द्वितीय पुरस्कार विजेता को ₹ २१००/-, तृतीय पुरस्कार विजेता को ₹ ११००/- की राशि प्रदान की जायेगी। ₹ ५०१/- के दो सान्त्वना पुरस्कार भी प्रदान किये जायेंगे। पुरस्कृत गीतकारों का सम्मान समारोह एवं काव्यपाठ लखनऊ में आयोजित कवि सम्मेलन में सम्पन्न होगा।

नियम एवं शर्तें

१. गीत २५ दिसम्बर २०१९ से १५ जनवरी २०२० के मध्य ही लिखा एवं फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया जाना आवश्यक है।
२. केवल एक प्रविष्टि ही स्वीकार्य है। गीत व्याकरण के मानक शिल्प के अनुरूप होना आवश्यक है।
३. निर्णायक मण्डल का निर्णय अन्तिम एवं मान्य होगा।
४. प्रतिभागी द्वारा किसी भी प्रकार की सिफ़ारिश या दबाव की स्थिति में प्रविष्टि तत्काल निरस्त कर दी जायेगी।
५. रचना यूनिकोड फ़ॉन्ट में dheerajkmish@gmail.com पर १५ जनवरी २०२० की मध्यरात्रि तक भेजना अनिवार्य है। विलम्ब से भेजी गयी प्रविष्टि को निरस्त कर दिया जायेगा।
६. प्रतिभागी की अधिकतम आयु ३० वर्ष होनी आवश्यक है।
७. किसी भी न्यायिक विवाद का क्षेत्र लखनऊ रहेगा।

निर्णायक मण्डल
श्री ज्ञान प्रकाश अवस्थी 'आकुल'
श्री राघव शुक्ल
श्री चन्द्रेश शेखर शुक्ल
श्री आदर्श सिंह 'निखिल'
श्री अमर नाथ 'ललित'
____________________________
हो सके तो पोस्ट साझा करते चलें।

मंगलवार, 8 अक्टूबर 2019

8:18 am

बदायूं :पिछले कुछ समय पहले शहर मे एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया -- षटवदन शंखधार

कुछ इधर कई पढी ---------------------------------
कुछ इधर की पढी कुछ उधर की पढ़ी !
कैसे लगती भला तालियो की झड़ी !
एक श्रोता उठा और कहने लगा !
तुमने जब भी पढ़ी बाप की ही  पढ़ी !!

बदायूं :पिछले कुछ समय पहले शहर मे एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमे कई राष्ट्रीय स्तर के कवियो ने काव्य पाठ किया मंच का संचालन एक ओजस्वी कवि ने किया जिसने मंच की कलाकारी चलते हुये उस रचनाकार को सबसे पहले ही बुला लिया जबकि कई बार पहले उसने हमेशा ऐसे मंचो पर अपने आपको बीच मे पढने का निवेदन करते हुये देखा गया है लेकिन कुछ कवि शातिर दिमाग होते है कही शहर का व्यक्ति हिट न हो जाये इसलिए पहली बार मे ही बुला लो और फिर बेइज्जती करा दो !
उधर उस अकवि ने भी ऐसी रचना पढी जिसका जिसका वर्तमान परिस्थिति से दूर दूर तक कोई संबध नही था इतने मे ही एक बुजुर्ग श्रोता पीछे से झल्ला पढे और यह कहते हुये उठ गये कि इसने जब पढी बाप की ही पढी!
इतनी जब शहर के युवा कवि षटवदन शंखधार के कान मे पढी तो यह मुक्तक गढ दिया जिसकी चर्चा बहुत दूर दूर तक है

© षटवदन शंखधार
     बदायूँ (उ०प्र०)

षटवदन शंखधार

रविवार, 30 जून 2019

7:13 pm

वाराणसी :- विश्व जनचेतना ट्रस्ट वाराणसी जिला ईकाई ने किया काव्य गोष्ठी का आयोजन

दिनांक 30.06.2019 को जिला पुस्तकालय मे काव्य गोष्ठी का आयोजन विश्व जनचेतना ट्रस्ट वाराणसी जिला ईकाई ने किया तथा ग़ज़ल संग्रह"मोहब्बत" का पुन: विमोचन हुआ। इससे पहले यह ग़ज़ल संग्रह छतरपुर मध्यप्रदेश में आयोजित कवि सम्मेलन एवं विमोचन समारोह  में 3 फरवरी 2019 को पाठकों के सामने आया


मंगलवार, 4 जून 2019

गुरुवार, 7 फ़रवरी 2019

2:21 am

वाराणसी :- कवि सम्मेलन एवं मुहब्बत ग़ज़ल संग्रह का सफल आयोजन छतरपुर (म०प्र०) में

ज्ञान शिखा टाइम्स समाचार पत्र के वरिष्ठ संपादक, सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत की वाराणसी इकाई के अध्यक्ष आ. लियाकत अली 'जलज' जी को मुहब्बत भरी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ

2:13 am

कवि सम्मेलन एवं मुहब्बत ग़ज़ल संग्रह का भव्य विमोचन छतरपुर (म०प्र०) में हुआ

विश्व जनचेतना ट्रस्ट, भारत के संस्थापक दिलीप कुमार पाठक 'सरस' जी के अद्भुत संचालन में और नीतेंद्र सिंह परमार "भारत" के संयोजन में कवि सम्मेलन का आयोजन छत्रसाल स्मारक न्यास चौक बाजार, छतरपुर(म०प्र०) में आयोजित किया गया ।
इस सुअवसर पर 'मुहब्बत' साझा ग़जल संग्रह का विमोचन भी किया गया, जिसके प्रधान सम्पादक विकास भारद्वाज "सुदीप" ने विमोचनोपरांत कहा कि ग़ज़ल वह लफ्ज है जो कानों में पड़ते ही मुहब्बत का अहसास करता है, तो नश्तर सा दिल में चुभ भी सकता है, जिंदगी के हालात और अनचाहे फैसले से लेकर दिल की कशिश, कच्ची नींद के ख़्वाब सा नाज़ुक तो कभी बेवा की टूटी चूडियों सा भूखे के लिए रोटी सा उक्त भावों से यह 'मुहब्बत ग़ज़ल संग्रह' लबालब है तथा सम्पादक शैलेन्द्र खरे"सोम" ने कहा कि ग़ज़ल संग्रह में ग़ज़लकारों ने अपनी ग़ज़लें संग्रह में दी है साहित्यिक एवं प्रेमयुक्त सुपठनीय और सभी रसों का समागम है, विभिन्न प्रान्तों से पधारे कवियों के क्रम में संजीव खरे"समर्थ"जी, विकास भारद्वाज "सुदीप", लियाक़त अली'जलज'जी,कौशल कुमार पाण्डेय'आस'जी, बृजेन्द्र नारायण द्विवेदी'शैलेष'जी, राजेन्द्र प्रसाद बावरा जी,सन्तोष कुमार"प्रीत"जी,दिलीप पाठक 'सरस', आलोक सैनी जी, राजेश कुमार मिश्रा 'प्रयास'जी, शैलेन्द्र खरे 'सोम', तुलाराम अनुरागी"व्योम' विश्वेश्वर शास्त्री'विशेष',सुमित शर्मा 'पीयूष' की उपस्थिति ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।
इस अवसर वरिष्ठ विशिष्ट साहित्यकार शिवभूषण सिंह गौतम जी (कार्यक्रम अध्यक्ष),नवलकिशोर मायूस जी (विशिष्ट अतिथि),डॉ.राघवेंद्र उदेनिया सनेही जी रहे ।

गुरुवार, 10 जनवरी 2019

5:56 pm

मुहब्बत (ग़ज़ल संग्रह) - का विमोचन -- साहित्यिक आमंत्रण


🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁
       🙏 *साहित्यिक आमंत्रण* 🙏
आदरणीय कवि बंधुओं एवं प्रबुद्धजनों को अवगत कराते हुए हर्ष हो रहा है कि विश्व जनचेतना ट्रस्ट छतरपुर मध्यप्रदेश द्वारा *दिनांक 03 फरवरी को शाम 04 बजे* काव्य संकलन *_मुहब्बत (ग़ज़ल संग्रह)_* का विमोचन, सम्मान समारोह एवं काव्यपाठ का आयोजन सम्पन्न होगा|
स्थान:- बुन्देलखण्ड केशरी छत्रसाल स्मारक न्याय (ट्रस्ट) चौक बाजार छतरपुर मध्यप्रदेश
*कृपया आने वाले सभी साहित्यकार अपना नाम,पता तथा नंबर अंकित करें ~ ~*
नोट~~ विश्राम हेतु स्थान एवं समुचित जलपान की व्यवस्था हेतु कृपया *निम्नलिखित लिस्ट में अपना नाम अंकित करें -------*
कार्यक्रम संबंधी एवं आवागमन हेतु जानकारी के लिए कृपया 
  नीतेन्द्र सिंह परमार 'भारत' से मो० नं०
~ ```8109643725``` ~
पर सम्पर्क करें ~~
विकास भारद्वाज मो० न० 9627193400


गुरुवार, 18 अक्टूबर 2018

6:27 am

भवानीमंडी के साहित्यकार राजेश पुरोहित होंगे राष्ट्रीय स्टार डायमंड अचीवर्स अवॉर्ड से सम्मानित

भवानीमंडी:-यूथ वर्ल्ड सोशल समूह द्वारा 22 व 23 अक्टूबर को मरु नगरी बीकानेर  में यूथ वर्ल्ड सोशल मीडिया मैत्री सम्मेलन 2018 बीकानेर के वेटनरी सभागार में होगा । राष्ट्रीय स्टार डायमंड अचीवर्स अवार्ड समारोह के इस  भव्य आयोजन में भवानीमंडी के कवि साहित्यकार राजेश कुमार शर्मा पुरोहित को राष्ट्रीय स्टार अचीवर्स अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा।
            पुरोहित को यूथ वर्ल्ड सोशल समूह के प्रमुख और आयोजन के कोऑर्डिनेटर भेरू सिंह राजपुरोहित ने ये जानकारी दी ।
  दो दिवसीय समारोह का आगाज़ यूथ वर्ल्ड सोशल समूह के संरक्षक राष्ट्रपति अवार्डी राजेन्द्र कपूर; दिल्ली,समाज सेवी राजकंवर राठौड़;जयपुर,सेन्टर फ़ॉर वीमेन स्टडीज की डायरेक्टर डॉ. मेघना शर्मा,फ़िल्म प्रोड्यूसर अशोक सिंह शक्तावत,प्राकृतिक चिकित्सक अनिता तंवर;ऋषिकेश,देव शर्मा,ललिता संजीव महरवाल;जयपुर,समाज सेवी अमन लवली मोंगा; सिरसा,डॉ. चेतन प्रकाश राजपुरोहित,समाज सेवी कु.गजेंद्र सिंह टुकलिया,समाज सवी राज शर्मा नींदड़,सुप्रसिद्ध कवियित्री डॉ. पूनम मटिया;दिल्ली सहित देश प्रदेश की वरिष्ठ शख्सियतों के सानिध्य में होने जा रहा है। इस समारोह में देश प्रदेश की 101 विशिष्ट प्रतिभाओं को विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्टार डायमंड अचीवर्स अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। समारोह में डॉ. मेघना शर्मा मुख्य वक्ता के रूप में उद्बोधन देगी व अपने कर कमलों से 101 प्रतिभाओं को सम्मानित करेगी।

विशिष्ट पोस्ट

सूचना :- रचनायें आमंत्रित हैं

प्रिय साहित्यकार मित्रों , आप अपनी रचनाएँ हमारे व्हाट्सएप नंबर 9627193400 पर न भेजकर ईमेल- Aksbadauni@gmail.com पर  भेजें.