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मंगलवार, 7 अप्रैल 2020

10:46 am

ग़ज़ल :- तुम्हें देखा लगा जैसे कि तुमसे जिंदगानी है - सना परवीन

एक प्रयास
काफ़िया - आनी
रदीफ़ -   है।
बहर  -  1222 x4

तुम्हें  देखा  लगा  जैसे  कि तुमसे जिंदगानी है ।
बना लूँ हमसफर तुमको ये मेरे दिल ने ठानी है ।।
 

रखेगा याद हमको यह ज़माना आखिरी दम तक,
लिखेगें प्यार का नगमा नहीं झूठी कहानी है ।।

नहीं बाकी रहा देखो वफाओं का नगर कोई,
जफा की आँधियों में उड़ गई हर इक निशानी है।

तुम्हारे  साथ मे होंगी हमेशा सीरतें साहब,
ये सूरत चार दिन की है ये पल दो पल जवानी है।

हँसीं रंगों से उल्फ़त के भरूंगी मैं तिरा दामन,
मुझे तो साथ तेरे  प्यार की महफ़िल सजानी है।

सना मेहनाज़
हरदोई
7:20 am

ग़ज़ल :- चढ़ता रहा खुमार तुम्हारे शबाब का - सना परवीन

221 2121  1221 212

चढ़ता रहा खुमार तुम्हारे शबाब का,
मिलने लगा जवाब मुझे मेरे ख़्वाब  का।

तुमने जो फूल छुपके  दिया था क़िताब में
हर हर्फ़ ख़ुशबूदार  है अब तक क़िताब का 

बेचैन हो रही हूँ यही सोच सोच कर
कोई खबर न खत ही  मिला है जनाब का।

देकर दिलासा आप ये टालेगें कब तलक
पैग़ाम आ रहा है मिरे घर नवाब का ।।

वो पूछते हैं आज *सना* क्या दिया हमें
रखता है कौन प्यार में पर्चा हिसाब का ।।

सना परवीन 

12:41 am

ग़ज़ल :- ख्वाब का वो कारवां जाने किधर खोने लगा - सना परवीन


काफ़िया- ओने
रदीफ़-  लगा
बह्र-  2122  2122  2122  212

ख्वाब का वो कारवां जाने किधर खोने लगा
मैं जगी आँखों को फिर से अश्क से धोने लगा 

याद में मुझको तड़पता देखकर ऐ जानेमन
चाँद तारों से लिपटकर फूटकर रोने लगा।

रफ़्ता रफ़्ता बढ़ रहा है मस्तियों का सिलसिला
मेरी यादों के महल में जब से वो सोने लगा 

नफ़रतों से जल रहा है आज घर-घर आदमी 
प्यार के मैं बीज यूँ भी हर तरफ़ बोने लगा 

सादगी हुस्न-ओ-तबस्सुम दिलकशी थी इस कदर 
देखकर उस शख़्स को बस इश्क सा होने लगा 

सना  'मेहनाज़'
हरदोई
12:38 am

ग़ज़ल :- ये बादल तुम पे बरसेंगे वफ़ा की बात जब होगी - सना परवीन

1222 1222 1222 1222

ये बादल तुम पे बरसेंगे वफ़ा की बात जब होगी ,
कि गुजरेंगे खयालो से हम दिलो की रात जब होगी ।

तुम्हारे दिल में हम उतरेंगे वो रानाइया लेकर ,
धड़कती धडकने उस दम हमारे साथ जब होगी ।


अजी हमको यकी तुमपे तो खुद से भी जियादा है ,
चली आऊगी मैं दौड़ी तेरी आवाज़ जब होगी ।

सना कहती चले संग संग कि देखा कल किसी ने ना 
गिरेगे अश्क आंखों से वो यादें याद जब होंगी ।

कभी डोली मेरे आगन लेकर तो  आईये हमदम 
बनूगी मैं तेरी दुल्हन शब-ए - बारात जब होगी l

सना परवीन
12:06 am

ग़ज़ल :- तुम्हारे दिल का करार हम हैं हमारे दिल का करार तुम हो - सना परवीन

12122 12122 12122 12122

तुम्हारे दिल का करार हम हैं हमारे दिल का करार तुम हो ।
इसी से दिल में खुशी बसी है ,हमारे दिल पर निसार तुम हो ।।

हुआ मुकम्मल ये इश्क़ तुम से नहीं अधूरा कुई सफ़र है ,
लगा लु खुद को गले से तेरे पनाह तुम हो हिसार तुम हो।

सजा दे जुल्फ़ो को आज मेरी बना ले हमको हबीब अपना,
महकती सांसे बता रही हैं वो बाग तुम हो बहार तुम हो।

हमे मिली है ये नामवारी ये ऐश इशरत व ताजदारी ,
बता दूँ सारे जहाँ मे मैं वो नबाब तुम हो वकार तुम हो।

फ़जा कि रंगत बदल रही है तुम्हारी यादें सता रही हैं 
सना करे ये सना तुम्हारी वफ़ाए तुम हो ख़ुमार तुम हो ।

सना परवीन
12:03 am

ग़ज़ल :- हसींं खूबसूरत सितारे बहुत हैं - सना परवीन

122 122 122 122

हसींं  खूबसूरत  सितारे बहुत हैं ।
गुलाबी फ़िज़ा में नजारे बहुत हैं ।।

पलटकर के देखो जमाने में साहिब 
हमारे सिवा भी तुम्हारे बहुत हैं। 

न समझे मुझे तुम न मेरी मुहब्बत
किये मैने तुमको इशारे बहुत हैं।

गुलों की ये खुशबू डराती बहुत है
पड़े दिल पे मेरे शरारे बहुत हैं।

हुई हद है अब तो चले आओ दिल मे
बिना आपके पल गुजारे बहुत है।

झुका लो यहाँ सर जहाँ भी हो गलती
शहर में वली की मजारें बहुत हैं।

सना डर न जाना कहीं जंग में तुम 
फतह कर मुहब्बत में हारे बहुत हैं।

सना परवीन 
12:01 am

ग़ज़ल :- नींद आंखों से रुठ जाती है - सना परवीन

बहर - 2122 1212 22
रदीफ़- है
काफिया- आती

नींद आंखों से रुठ जाती है
हिज्र में याद जब सताती है।

दिन गुज़रता है तेरी यादो 
रात ख्वाबो में बीत जाती है।

चुप लगा जाती है हर इक आवाज़
ख़ामुशी शोर जब मचाती है।

बिन तेरे जीना अब हुआ मुश्किल
मेरी चाहत तुझे बुलाती है।

दिल की टहनी पे याद की कोयल
इश्क़ के गीत गुनगुनाती है।

सादगी ऐसी क्या कहें अब हम
अपना ग़ैरों को भी बनाती है।

अश्क लगते हैं बहने आंखों से
जब भी वो दास्ताँ सुनाती है।

हाँ *सना* बस खुदा ही जाने ये
बे कसी हमको जो सताती है।

सना
हरदोई

सोमवार, 6 अप्रैल 2020

8:58 pm

ग़ज़ल :- मेरी आँखों को गर पढ़ा होता - सना परवीन

2122 1212 22

मेरी आँखों को गर पढ़ा होता
इतना दावा है तू मिरा होता ।

और करता यकीं अगर मुझपर
तू मेरे दिल से न जुदा होता।

खत मुहब्बत के हम भी लिखते पर
तेरे घर का पता मिला होता।

बेवफ़ा मुझको कहने से पहले
मशवरा दिल से कर लिया होता 

फासले दरमियाँ न होते गर 
कुछ सुना और कुछ कहा होता।

मौला तुझको  मुआफ़ कर देते 
तूने छोंटों को जो किया होता

ऐ *सना* काश जीते जी उससे
हक़ मुहब्बत का भी अदा होता।

सना
हरदोई
8:56 pm

ग़ज़ल :- प्यार हमने कभी भी जताया नहीं - सना परवीन

प्यार हमने कभी भी जताया नहीं
दर्द दिल में है कितना दिखाया नहीं।

हो न जाऊं मैं रुसवा कहीं प्यार में
रुख से पर्दे को मैने हटाया नहीं।

वो तड़पकर के आएंगे इक रोज जब
बस तभी दिल पे ताला लगाया नहीं।

मैं मुकम्मल नहीं हूँ बिना आपके 
आपका नाम दिल से मिटाया नहीं।

जाने क्या हो गयी मुझसे एसी खता
लौटकर जो कभी घर पे आया नहीं 


क्या सना जानती है तुम्हारी तलब
मैने उलफत का शोला बुझाया नहीं।

सना परवीन 
8:53 pm

ग़ज़ल :- कहते थे कभी हमसे बस हमतो तुम्हारे हैं - सना परवीन

कहते थे कभी हमसे बस हमतो तुम्हारे हैं
वो  हमसे ज़रा देखो कर बैठे किनारे हैं।

हैरान हूँ मैं खुद भी मिलकर न मिला मुझको 
लगता है कि किस्मत के ग़र्दिश में सितारे हैं।

उनके ही सहारे हम जायेंगे युँही जीते
जो हमने कभी तेरे पल साथ गुज़ारे हैं

अफसोस रहेगा यह ता उम्र हमें दिलबर 
हम जीत के भी देखो इस जंग को हारे हैं।

जो याद कभी मुझको करता ही नहीं है अब 
साँसे यह मेरी फिर भी बस उसको पुकरे हैं।

लगता है सना,मुझको उसने तो मुहब्बत में 
जो साथ बिताऐ पल एहसान उतारे हैं

सना परवीन 
8:51 pm

ग़ज़ल :- कलेजे से लगाया माँ ने, मौसी ने दुलारा है - सना परवीन

कलेजे से लगाया माँ ने, मौसी ने दुलारा है
सजाया मुझको हिंदी ने तो उर्दू ने संवारा है

अधूरी हुँ बिना इनके मैं पूरी हो नही सकती
मेरी हिंदी जरूरत है मेरा उर्दू सहारा है।

फ़ुहार आती है ज़म ज़म की लिखूं जब लफ़्ज़ उर्दू केे 
मिलूं हिंदी से लगता है कि गंगा का किनारा है।

अगर देखो इन्हें तुम साथ तो ये ही कहोगे तुम
बहुत ही खूबसूरत है बड़ा दिलकश नजारा है।

हमारी शान है उर्दू हमारी मान है हिंदी
इसे तोले जो मजहब से नही हमको गवारा है

सना
8:50 pm

ग़ज़ल :- बिखरी हुई जुल्फ़ो को सजा दीजिये - सना परवीन

बिखरी हुई जुल्फ़ो को सजा दीजिये ,
मुहब्बत है हमसे कितनी बता दीजिये।

बैठ जाऊ जानिब तेरे कुछ इस तरह ,
फ़ासला ए दरमिया सब मिटा दीजिये ।

चलती रहू तेरे हमकदम मैं उम्र भर ,
चाहतो के सिलसिले यू लगा दीजिये ।

बरगला न दे जमाना वहदानियत से ,
अहले वफ़ा ए इश्क़ सबको जता दीजिये ।

डर न जाए सना कही शब के अंधेरो से ,
मुहब्बतो के रोशन दिये जला दीजिये।

सना
8:47 pm

ग़ज़ल:- शब ए फ़िराक़ में तन्हा रहा नहीं जाता - सना परवीन

1212 1122 1212 22

शब ए फ़िराक़ में तन्हा रहा नहीं जाता 
तुम्हारी याद से हमदम बचा नहीं जाता 

चढा है जब से नशा तेरे प्यार का हमपर 
है इश्क कितना ये अब तो कहा नहीं जाता l

इशारे करती है तन्हाई वस्ल की जानिब...
सनम से दूर क़सम से जिया नहीं जाता 

निगाह पड़ते हि हमपर बरसते रंग नूर के 
तुम्हारे बिन अब यहाँ सजा नहीं जाता l

पुकारती ये सना आज इन वीरानो से 
बगैर तेरे अब हमसे चला नहीं जाता l

सना
7:08 pm

ग़ज़ल :- सोचती हूँ हर शब कि क्या कर रही हूँ - सना परवीन

सोचती हूँ हर शब कि क्या कर रही हूँ ,
इश्क या फिर कोई खता कर रही हूँ l

तुझसे मिलना मेरा लिबास ए हया में 
तू बता दे मुझको बजा कर रही हूँ 

इल्म मुझको इन फ़ितरतो का नहीं था 
हर घडी मैं गुनाह ए वफ़ा कर रही हूँ

सादगी ऐसी उनकी अब क्या कहुँ मैं 
बात लफ़्जो से मैं अदा कर रही हूँ 

फ़िर न आयेंगी मिलने रुसवाइया ये 
इस जमाने से तुझको जुदा कर रही हूँ 

कुछ न हासिल होगा सना जानती है 
फ़िर क्यों खुद से ज़फ़ा कर रही हूँ

सना परवीन 

रविवार, 5 अप्रैल 2020

11:48 pm

ग़ज़ल :- न देखू तुझको तो दुनिया सनम बेकार सी लगती - सना

न देखू तुझको तो दुनिया सनम बेकार सी लगती 
गुलो की खुशबू झुठी और कलिया खार सी लगती l 

तेरी आँखे जताती हैं मोहब्ब्त मुझ पे ऎ हमदम
खमोशी तेरे होंठों की मुझे इजहार सी लगती  l 

चले आओ न तड़पाओ बुलाता ये हसी मन्जर 
तुम्हारे बिन ये राहे तो मुझे मझधार सी लगती l 

हमारी रह गुजर से जो गुजरते हो कभी जब तुम 
महक उठता है कूचा तब गली गुलजार सी लगती l 

सना पढ़ती है जब तुमको तुम्हारे प्यार में खोकर 
तुम्हारी ज़ात मुझको एक दम अखबार सी लगती l 

सना परवीन
हरदोई
11:42 pm

नज़्म :- ये माना कि दुनिया ने माना नही - सना

यह सत्य है कि भारत आजाद हो चुका है।बदलते समय के साथ बहुत से परिवर्तन हुए लेकिन पुरातन रीति रिवाज आज भी हमारे देश मे व्याप्त हैं । नारी जो हमारे जीवन मे सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किंतु आज भी कही कही नारी को बराबर का सम्मान नहीं दिया जाता है। कन्या भ्रूण हत्या भी एक ऐसा कारण है जो इंगित करता है नारी की ओर। 

आइये एक माँ ह्रदय से उपजे भाव को ह्रदय से समझने की कोशिश करें।

ये माना कि दुनिया ने माना नही
तभी मां भी कहती है आना  नही
ये रिश्ते ये नाते ये रश्मों की बातें
हकीकत है क्या तुमने जाना  नही।

 है बेटों की चाहत दिलों में यहाँ
नही प्यार तुझको मिलेगा यहाँ
मुहब्बत की हसरत जगांना नही
हकीकत है क्या तुमने जाना नही।

तुझे तेरे हक न मिलेंगे कभी
बराबर में चलने न देंगे कभी
इन आँखों मे सपने सजाना नही
हकीकत है क्या तुमने जाना नही।

दौलत का लालच यहाँ है सभी को
लेना है सबको न देना किसी को
पिता को तेरे सर झुकाना नही
हकीकत है क्या तुमने जाना नही।

बन कर सवँर कर न चल पाएगी
गहन रातोँ में कैसे निकल पाएगी
दाग अस्मत पे तेरी लगाना नही
हकीकत है क्या तुमने जाना नही।

मैं माँ हूँ मुझे याद सब है जबानी
गुजरे हुए दौर की मैं निशानी
झूठ अब कोई तुझसे छुपाना नही
हकीकत है क्या तुमने जाना नही।

सना मेहनाज़
हरदोई
11:40 pm

ग़ज़ल :- गुज़रना जिस गली से वो गली गुलज़ार कर लेना - सना परवीन मेहनाज़

गुज़रना जिस गली से वो गली गुलज़ार कर लेना 
मुनासिब हो निगाहों से महज़ इजहार कर लेना 

गुनाहो को यहाँ देखा सभी को जानकर करते
अगर हो जाए गलती तुमसे अस्तग़फ़ार कर लेना।

नहीं मुझको मिला कोई ज़माने में तेरे जैसा 
मै राहों में खड़ी तेरी कभी दीदार कर लेना ।

कभी मौका मिले तुमको न पीछे यार तुम हटना 
गले  लगकर मुहब्बत से ज़रा सा प्यार कर लेना।

मेरी आँखो की गहराई समन्दर से भी ज्यादा हैं 
मुझे गर   चाहते  पाना तो दरिया  पार कर लेना ॥ 
   
सना परवीन मेहनाज़
हरदोई
5:11 pm

नज़्म - तेरी याद आ रही है हर शब जगा रही है - सना



तेरी याद आ रही है हर शब जगा रही है
मेरी चाहतें तुझे अब पल-पल बुला रही हैं

तुझे प्यार करना चाहूँ मेरे यार जुस्तजू है
तुझे दिल में मैं बसा लूँ मेरे दिल की आरजू है
गम ए हिज्र की ये रातें मुझको सता रही है।

मुझे छोड़कर न जाओ तुम्ही मेरे हमनवा हो
रहें साथ उम्र भर हम न कभी भी हम जुदा हों
मेरे होठों पे तबस्सुम ये खुशी दिला रही है।

तुझे याद आएगी ये मेरे साथ गुजरी रातें
मेरी वालिहाना चाहत ये मुहब्बतों की बातें
कहीं दूर हम चलें पर  रश्म ए जुदा रही हैं।

सना 
हरदोइ

सोमवार, 30 मार्च 2020

3:34 am

ग़ज़ल :- तुम साथ न दो मेरा खुद राह बना लेंगे - सना परवीन

तुम साथ न दो मेरा  खुद राह बना लेंगे
धरती से गगन तक हम  मंजिल को' भी' पा लेंगे।

क्या आज हुआ तुमको, जो रूठ गये साजन,
हम अपने ही' शानों पर, हर बोझ उठा लेंगे।।

काँटो से' बगावत भी, क्या करना' जमाने में,
चुभते हैं' अगर तो हम, कलियों को' खिला लेंगे।।

गिरते हुए' अश्कों का, इक मोल जरूरी है,
हम दिल के' दरीचे भी, आंखों को' बना लेंगे।।

इक दर्द छुपा दिल में, मुश्किल है' समझ पाना,
हर ग़म को' 'सना' लेकिन, खुशियों से मिला लेंगे।।

सना परवीन
1:57 am

बढ़ा लो फासले यारों वफ़ाएं अब नही मिलतीं - सना परवीन

गजल  1
बह्र - 1222 × 4
काफ़िया - एं स्वर
रदीफ़ - अब नही मिलतीं

बढ़ा लो फासले यारों वफ़ाएं अब नही मिलतीं ।
नजर जो फेर ली जब से अदाएं अब नही मिलतीं ।।

सुनाऊँ हाल मै दिल का सुनूं मै किस तरह उसको ।
हुआ खामोश जब से वो सदाएं अब नही मिलतीं ।।

किये वो जा रहा बेख़ौफ़ होकर के गुनाहों को ।
 दिलों को तोड़ने की भी सजाएं अब नही मिलतीं ।।

बड़ी ही बे समझ थी मै  ,न समझी माँ के दामन को ।
बचाऊँ खुद को मै कैसे दुवाएं अब नही मिलतीं ।।

नशीली शाम का मंजर बड़ा ही तल्ख लगता है ।
फिरूँ मै ढूंढती हरदम फजाएं अब नही मिलती ।।

सना परवीन 'मेहनाज'

गजल 2
बह्र - 221 1222 221 1222
काफ़िया - आ स्वर
रदीफ़ -  लेंगे

तुम  साथ  न  दो  मेरा  खुद  राह बना  लेंगे ।
धरती से गगन तक हम मंजिल को भी पा लेंगे ।।

क्या आज हुआ तुमको जो रूठ गये साजन ।
हम अपने ही शानों पर हर बोझ उठा  लेंगे ।।

काँटो  से  बगावत भी  क्या करना जमाने में ।
चुभते हैं अगर तो हम, कलियों को खिला लेंगे।।

गिरते हुए अश्कों का इक मोल जरूरी है ।
हम दिल के दरीचे भी आंखों को बना लेंगे ।।

इक दर्द छुपा दिल में, मुश्किल है समझ पाना ।
हर ग़म को सना लेकिन, खुशियों से मिला लेंगे ।।

सना परवीन 'महनाज'

गजल 3
बह्र - 221 1222 122 1222
काफ़िया - आर
रदीफ़ - कर लू मैं

फुरकत के लम्हों में नैन अब चार कर लूं मैं ।
दानिशतां  सनम  मेरे  तुझे  प्यार कर लूं मैं ।।

खुद को भुला दुं खो जाऊं कुछ इस तरह तुझमें ।
होने   लगी   हूं   अब   तेरी  इकरार  कर  लूं मैं ।।

शरमा के यूँ नज़रें उठ के झुक ही गई मेरी ।
खामोश होठों से अब यूँ इजहार कर लूं मैं ।।

तसव्वुर में हमनशी छू कर के तुझको देखूँ ।
दिल मे रख के तुझको बातें हजार कर लूं मैं ।।

हो   जाऊं   मैं   फना  कुछ ऐसे काम आऊं ।
आगोश में भरके तुझे खुद पे वार कर लूं मैं ।।

सना परवीन 'महनाज'

विशिष्ट पोस्ट

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