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रविवार, 5 मार्च 2017

12:23 am

इश्क में पागल दीवानी लडकी

लहरें मुहब्बत की तुम्हारे दिल से उठती हो
किसी के इश्क मे पागल दीवानी लगती हो
जिसको एक नजर निगाहो में देख लेती हो                          
कयामत तक उस दिल को होश नही देती हो

फिजाओं में तुम हो इन घटाओं में तुम हो
इन हवाओं में तुम हो इन बहारों में तुम हो
नर्म धूप में तुम हो पेडो की छाँव में तुम हो
मेरे डायरी के हर अल्फाज गजल में तुम हो

कश्मीरी बर्फीली हसीन सर्द रात सी तुम हो
शर्मीली आँखो से मासूम लडकी दिखती हो
जब भी पथ पर मुस्कराके इतराके चलती हो
उस बाग मे सुन्दर गुलाब की कली लगती हो

©कवि विकास भारद्वाज "सुदीप"
     9627193400
25 फरवरी 2017

मंगलवार, 20 दिसंबर 2016

6:22 am

उसकी जुल्फो में एक शाम

जब मेरे खत पढ किताब मे रख कुछ होंटो पर गुनगुना रही थी,
सोचकर रातों को यादो मे सुन्दर सपने सजा रही थी ।
छत पर बैठी मेरा ज़िक्र कर,मुस्कुरा रही थी
ये हिचकी शाम से, यूँ ही तो नहीं आ रही थी ।।
दीवार-ए-आईना मे जुल्फो को हटा रही थी,
माँ से नजर बचाकर मुझसे मिलने आ रही थी ।
मेरे सामने वो बैठकर नजरें छुपा रही थी,
हम जानते थे कि रस्म-ए-उल्फ़त भी यूँ निभा रही थी ।।
उसके रूखसार पे तिल भी गजब ढा रहा था,
आँखो में काजल लगाकर मुझपर नजरो से पिलायें रही थी ।
उसकी आँखो में देखता रहा मैं और सुबह से सहर हो गयी,
फिर शाम को अपनी गली में मुझे खिडकी से देख रही थी ।।
ऐसी लडकी थी उसकी जुल्फो मे शबनम शाम थी,
जब गाँव लौटे तो मालुम पडा मोहब्बत किसी गैर की हो गयी ।
अचानक रास्ते मे मिली नजरे फेर ली उसने,
आज उसकी याद विकास दिले-नाशाद कर रही थी ।।

गुरुवार, 15 सितंबर 2016

6:25 am

एक पल का उसका दीदार-ए-हसरत

मुझे खिडकी से देखने का इंतजार कर रही थी,
यूँ इशारो मे वो दीवारो से बात कर रही थी ।
कभी मेरी यादों के ख्यालों में खोने लगी,
कभी मेरी फोटो को छुपके से निहार रही थी ।।
खत मेरे नाम लिख किताबो मे छुपाने लगी,
खत की गुलाब-ए-ख़ुशबू📃ये बता रही थी।
लिखते हुए उसके चाँद से चेहरे पर जुल्फे खुल रही थी,
आँखों मे आँसुओं की सैलाबे-गम दिख रही थी।।
प्यार की खुश्बू उसकी सांसो से आ रही थी,
चेहरे पर शोरे निशूर* देख मेरी धड़कन बडती जा रही थी।
उस दिन वो सुर्ख़ लाल जोडे में बहुत सुंन्दर लग रही थी,
मगर विकास पहली बार वो किसी और की लग रही थी ।।
शोरे निशूर= कयामत के दिन का शोर
©विकास भारद्वाज "सुदीप"

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