मुक्तकें
2:01 am
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मंगलवार, 14 अप्रैल 2020
सोमवार, 13 अप्रैल 2020
रविवार, 5 अप्रैल 2020
मुक्तकें
11:23 am
आदित्य तोमर की कुछ मुक्तकें
मुक्तक
खुशियाँ तो ज़िन्दगी में न जाने कहाँ रहीं.
बे-घर ही मेरी हसरतों की तितलियाँ रहीं.
रहने को तुम ही थे जो यहाँ कुछ बरस रहे,
आँखों में बाक़ी उम्र महज़ सुर्ख़ियाँ रहीं.
-
आदित्य तोमर,
वज़ीरगंज, बदायूँ.
जीवन का वह दौर सुनहरा फिर देखें.
नदियों के रस्ते से सहरा फिर देखें.
आँखों की ख़्वाहिश है बुझने से पहले,
एक बार वह दिलकश चेहरा फिर देखें.
-
आदित्य तोमर,
वज़ीरगंज, बदायूँ.
बेख़याली में भी इतना होश का पहरा रहा।
मुन्तज़िर आँसू पलक पर देर तक ठहरा रहा.
इक विवादित भूमि बनकर रह गया मेरा ये दिल,
नाम तो उसके हुआ कब्ज़ा मगर तेरा रहा।
-
आदित्य तोमर,
वज़ीरगंज, बदायूँ.
वक़्त से नज़रें चुराने का न सर इल्ज़ाम लेना.
दिनकरो ! थकने न रुकने का अभी से नाम लेना.
सीढ़ियों पर लड़खड़ाकर गिर रही है फिर सियासत,
फ़र्ज़ यह साहित्य का है, दौड़कर तुम थाम लेना.
-
आदित्य तोमर,
वज़ीरगंज, बदायूँ.
ढेर दौलत के भले हम न कमाएँ भगवन.
आपकी भक्ति के झरने में नहाएँ भगवन.
प्रार्थना है यही जीवन में हमारे कारण,
आँख में आँसू किसी के नहीं आएँ भगवन.
-
आदित्य तोमर,
वज़ीरगंज, बदायूँ.
शनिवार, 4 अप्रैल 2020
बुधवार, 1 अप्रैल 2020
मंगलवार, 3 मार्च 2020
मुक्तकें
1:57 am
दिल से निकले ज़ज्बात. ..सांझा आपके साथ ...
मान्यवर मित्रों ,
लो क्ल लो बात ......
दिल से निकले ज़ज्बात. ..सांझा आपके साथ ...
कैसे मनायें होली .....
नित देश में खेल रहे अब खून की होली
कैसे मनें प्यार सौहार्द और रंगों वाली होली
रंग हुये बेरंग और व्यवहार भी अपना खोया
चेहरे हुये सब बदरंग अब कैसे मनायें होली
आपका अपना
वीरेन्द्र कौशल
सोमवार, 17 फ़रवरी 2020
मुक्तकें
1:57 am
ज़िन्दगी का मजा नहीं खोना है....
मुक्तक
ज़िन्दगी का मजा नहीं खोना है....
दिल्लगी इक सजा नहीं रोना है....
कैसा है ये नशा मोहब्बत का...
आपसे अब जुदा नहीं होना है....
#पारस_शायर
गुरुवार, 4 जुलाई 2019
मुक्तकें
5:19 am
ग़ैरों की बेटी पर तो - वीरेंद्र कौशल
ग़ैरों की बेटी पर तो
आप अपनी जान तक देते हो
लेकिन जब आपके
अपने बेटी होने लगती है
तो उसकी जान क्यों लेते हो।
सदा जी भर मुस्कुराएं खुशियां फैलाएं
अपनी जान तक भी सदा देश पर लुटाएं
ताकि सबकी झोलियां भी लबालब भर जाएं
जाति-धर्म के बंधन से क्यों न मुक्त हो जाएं
देश-भक्ति छोड़ सभी क्यों न देश-प्रेमी हो जाएं
लगता आज हर शाख पर जल्लाद बैठें हैं
कर रहे जो घिनौने कर्म वो बेऔलाद बैठें हैं
सीमा के दायरों से निकल बाहर दोस्त वरना
सब समझेंगे हम नाहक मज़बूरियां लाद बैठें हैं
शब्दों के नए भंवर के साथ
एक बार फिर आप के पास
देश की ताज़ा घटना ने आईना दिखा दिया
कद्र क्या बेटियों की ऐसा माईना बता दिया
किस गहराई तक रह चुप समाज गर्त जाएगा
कानून मज़ाक निर्भया वक़्त मुआईना बना दिया
बुधवार, 3 जुलाई 2019
रविवार, 19 अगस्त 2018
शुक्रवार, 17 अगस्त 2018
मुक्तकें
11:40 pm
तुलसी मानस प्रीत से,हृदय करे झंकार, राम सिया की भूमि पर,भाव करें शृंगार - डॉ. प्रेमलता त्रिपाठी
तुलसी मानस प्रीत से,हृदय करे झंकार ।
राम सिया की भूमि पर,भाव करें शृंगार ।।
मिथ्या जग की साधना,पढ़ें न मानस वेद,
धन्य हो गये छंद भी,मानस में साकार ।।
जाने अनजाने हमें,हो जाये अभिमान ।।
रोम रोम जब गा उठे, हिंदी हिंदुस्तान ।।
अनदेखे अहसास से,जब हो गर्वित भाल,
सच्चा प्रेमी देश का,हृदय तिरंगा मान ।
डॉ. प्रेमलता त्रिपाठी
राम सिया की भूमि पर,भाव करें शृंगार ।।
मिथ्या जग की साधना,पढ़ें न मानस वेद,
धन्य हो गये छंद भी,मानस में साकार ।।
जाने अनजाने हमें,हो जाये अभिमान ।।
रोम रोम जब गा उठे, हिंदी हिंदुस्तान ।।
अनदेखे अहसास से,जब हो गर्वित भाल,
सच्चा प्रेमी देश का,हृदय तिरंगा मान ।
डॉ. प्रेमलता त्रिपाठी
शुक्रवार, 27 जुलाई 2018
मुक्तकें
1:07 am
कलम अनवरत् फिर चलती जायेगी तब हमें खूबसूरत सी मंजिल हासिल होगी - विकास भारद्वाज
गुरू जी चरणों में मेरी कुछ पंक्तियां समर्पित :-
गुरू-चरणों से गुरू - ह्र्दय तक, गुरू-प्रेम से सींचेगा जब रूह अपनी होगी ।
कलम अनवरत् फिर चलती जायेगी तब हमें खूबसूरत सी मंजिल हासिल होगी !।
गुरू ही दर्पण, शिक्षा के द्वारा जनमानस-समाज को जागृत करते,
गुरू की डांट से न इतराना इसमें हमारी छुपी हुई भलाई होगी ।।
कलम अनवरत् फिर चलती जायेगी तब हमें खूबसूरत सी मंजिल हासिल होगी !।
गुरू ही दर्पण, शिक्षा के द्वारा जनमानस-समाज को जागृत करते,
गुरू की डांट से न इतराना इसमें हमारी छुपी हुई भलाई होगी ।।
हम रोज अभ्यास करे, गुरू जी बड़े प्यार से सिखाते है ।
गुरू जी के आशीर्वाद से ही हम अच्छा सृजन कर पाते है ।।
गुरू का तुम अपमान न करना वो सिर्फ सम्मान चाहते हैं,
जीवन में आने वाली कठिनाईयों से हमें अवगत कराते हैं ।।
गुरू जी के आशीर्वाद से ही हम अच्छा सृजन कर पाते है ।।
गुरू का तुम अपमान न करना वो सिर्फ सम्मान चाहते हैं,
जीवन में आने वाली कठिनाईयों से हमें अवगत कराते हैं ।।
© विकास भारद्वाज
27 जुलाई 2018
27 जुलाई 2018
मंगलवार, 17 जुलाई 2018
शुक्रवार, 13 जुलाई 2018
मंगलवार, 10 जुलाई 2018
रविवार, 8 जुलाई 2018
विशिष्ट पोस्ट
सूचना :- रचनायें आमंत्रित हैं
प्रिय साहित्यकार मित्रों , आप अपनी रचनाएँ हमारे व्हाट्सएप नंबर 9627193400 पर न भेजकर ईमेल- Aksbadauni@gmail.com पर भेजें.











