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गुरुवार, 2 अप्रैल 2020

7:24 pm

उस गली से रोज़ गुज़रा तब कहीं मुझपर खुला - चराग शर्मा

उस गली से रोज़ गुज़रा तब कहीं मुझपर खुला ।
क्यों वो रखती है दरीचे को ज़ियादातर खुला ।

जंग-ए-आज़ादी में काफ़ी लोग थे इस शहर के,
और फिर इस शहर में भी एक चिड़ियाघर खुला ।

तुमसे पहले भी मकान-ए-दिल में रहता था कोई
और तुम्हारे बाद भी रक्खेंगे दिल का दर खुला

एक फ्लाइट रद हुई है तेज़ बारिश के सबब
इक परिंदा उड़ रहा है पिंजरे के अन्दर खुला

चोर उचक्कों का हवाला बस बहाना है चराग़
बंद घर में भी नहीं रखता कोई लौकर खुला

- चराग़

us gali se roz guzra tab kahiN mujh pr khula
kyuN vo rakhti hai dareeche ko ziyadatar khula

jung-e-aazaadi me kaafi log the is sheher ke
or phir is sheher me bhi ek chidiya ghar khula

tumse pehle bhi makaan-e-dil me rehta tha koi,
or tumhare baad bhi rakkhenge dil ka dar khula .

Ek flight rad hui hai tez baarish ke sabab
ik parinda udd rha hai pinjare ke andar khula

chor uchakkoN ka hawala bas bahana hai charagh,
band ghar me bhi nhi rakhta koi locker khula .

- charagh

7:22 pm

ख़्वाब की लाश बहाने कोई आंसू आए - चराग़ शर्मा

ख़्वाब की लाश बहाने कोई आंसू आए !
इससे पहले कि मेरी आँखों से बदबू आए ।

तेरे ग़म की जो जगह है वो तेरे ग़म की है ,
दिल को ये भी नही बर्दाश्त वहां तू आए ।

इश्क़ की रोटी है ,मिल बाँट के खा लेते हैं,
क्यों भला बीच में दुनिया का तराज़ू आए ।

बहस करनी है तो इस शर्त पे करनी होगी,
होंठ सिल जाएं बिछड़ने का जो पहलू आए ।

मैंने लफ़्ज़ों से बुना है वो ग़ज़ल का क़ालीन,
बैठ के जिसपे मेरा ज़हन उसे छू आए ।

- चराग़

Khwab ki laash bahaane koi aansu aaey
Isse pehle ki meri aankhon se badboo aaey

Tere gham ki jo jagah hai vo tere gham ki hai
Dil ko ye bhi nhi bardaasht vahan tu aaey

Ishq ki roti hai mil baant ke khaa lete hain
Kyun bhala beech me duniya ka taraazu aaey

Behes krni hai to is shart pe krni hogi,
Honth sil jaaen bichhadne ka jo pehlu aaey

Maine lafzon se buna hai vo ghazal ka qaaleen
Baith ke jis pe mera zehen use chhu aaey

- charagh

7:20 pm

इक तो ये आसमां का सिरा मिल नही रहा - चराग़ शर्मा

इक तो ये आसमां का सिरा मिल नही रहा ।
ऊपर से हौसला भी मेरा हिल नही रहा ।
Ik to ye aasmaaN ka sira mil nhi rha
Ooper se hausla bhi mira hil nhi rha

उस बेवफ़ा पे कर ही लिया फिर से ऐतबार,
मैं अपने ऐतबार के क़ाबिल नही रहा ।
Us bewafa pe kar hi liya phir se aitbaar
Main apne aitbaar ke qaabil nhi rha

ख़ंजर में धार कम है ,गुलों में निखार कम
उसकी नज़र का कोई बदल मिल नही रहा ।
Khanjar me dhaar kam hai,guloN me nikhaar kam
Uski nazar ka koi badal mil nhi rha

ज़ख्मों ने और ज़ख्मों को दी ही नही जगह,
मुश्किल सफ़र से लौटना मुश्किल नही रहा ।
ZakhmoN ne or zakhmoN ko di hi nhi jagah
Mushkil safar se lautna mushkil nhi rha

तुम भी चराग़ रुख़ करो दफ़्तर का ,जब उसे
ज़ुल्फ़ें संवारने का समय मिल नही रहा ।
Tum bhi charagh rukh kro daftar ka , jb use
ZulfeN sanwaarne ka samay mil nhi rha

- चराग़

7:19 pm

मैं अपनी तस्वीर उसके मारे बना रहा हूँ - चराग़ शर्मा

मैं अपनी तस्वीर उसके मारे बना रहा हूँ ।
सो चेहरे के दाग़ प्यारे प्यारे बना रहा हूँ ।
Main apni tasweer uske maare bna rha huN
So chehre ke daagh pyare pyare bna rha huN

वहां वो टीचर ज़मीं का लेसन पढ़ा रही है,
यहाँ मैं कॉपी के पीछे तारे बना रहा हूँ ।
VahaN vo teacher zameeN ka lesson padha rhi hai
YahaN maiN copy ke peechhe tare bna rha huN

मुझे पता है कि क्या बनाने से क्या बनेगा,
सो कारख़ाने नही इदारे बना रहा हूँ ।
Mujhe pta hai ki kya banaane se kya banega
So kaarkhane nhi idaare bna rha huN

मैं अपने कमरे में काग़ज़ी फूल उगाने वाला,
ग़ज़ल का पर्दा लगा के नारे बना रहा हूँ ।
Main apne kamre me kaghazi phool ugane wala
Ghazal ka parda lga ke naare bna rha huN

ऐ फोटोग्राफ़र ! यूँ ही न बन जाता है तबस्सुम,
बना रहा हूँ, ठहर जा प्यारे ! बना रहा हूँ ।
Ay photographer! YuN hi na ban jata hai tabassum
Bna rha huN , theher ja pyaare ! bna rha huN

- चराग़
7:15 pm

अमूमन हम अकेले बैठते हैं - चराग़ शर्मा

अमूमन हम अकेले बैठते हैं ।
वो बैठा है तो चलिए बैठते हैं ।
Amooman hum akele baithte haiN
Vo baitha hai to chaliye baithte haiN

मेरी आँखों में गुंजाइश तो कम है ,
पर उसके ख्व़ाब पूरे  बैठते हैं 
Meri aankhoN me gunjaaish to kam hai
Pr uske khwab poore baithte haiN

उठीं नजरें तो नज़रों से गिरेंगे ,
यहाँ नज़रों पे पहरे बैठते हैं ।
UthiN nazareN to nazaroN se girenge
Yahan nazaroN pe pehre baithte haiN

अदब का फ़र्श है ये ,इसपे बच्चे,
बुज़ुर्गों के सहारे बैठते हैं ।
Adab ka farsh hai ye, ispe bacche
BuzurgoN ke sahare baithte haiN

वो ख़ुद मरकज़ में थोड़ी बैठता है ,
सब उसके आगे पीछे बैठते हैं ।
Vo khud markaz me thodi baithta hai
Sab uske aage peechhe baithte hain

उदासी से भरोसा उठ रहा है ,
चलो नासिर को पढ़ने बैठते हैं ।
Udaasi se bharosa uth rha hai
Chlo naasir ko padhne baithte haiN

- चराग़

7:12 pm

चमन में कौन बबूलों की डाल खींचता है - चराग़ शर्मा

चमन में कौन बबूलों की डाल खींचता है ।
यहाँ जो आता है फूलों के गाल खींचता है ।
Chaman me kaun babooloN ki daal kheenchta hai.
Yahan jo aata hai, phooloN ke gaal kheenchta hai

वो तीर बाद में पहले सवाल खींचता है,
सवाल भी ,जो समाअत की  खाल खींचता है ।
Vo teer baad me , pehle sawal kheenchta hai.
Sawal bhi jo sama'at ki khaal kheenchta hai.

ऐ प्यार बांटने वाले !, मैं ख़ूब जानता हूँ,
के कितनी देर में मछुआरा जाल खींचता है ।
Aey pyaar baantne wale ! main khoob jaanta huN
Ke kitni der me machhu'ara jaal kheenchta hai .

निकल भी सकता हूँ क़ैदे तख़य्युलात से मैं
अगर वो खींच ले जिसका ख़याल खींचता है।
Nikal bhi skta huN qaid-e-takhayyulat se main
Agar vo kheench le jiska khyaal kheenchta hai.

मैं उसके आगे नहीं खींचता नियाम से तेग़,
वो  शेरशाह  जो दुश्मन की ढाल खींचता है ।
Main uske aage nhi kheenchta niyaam se tegh
Vo shershaah, jo dushman ki dhaal kheenchta hai.

ये सर्द सुबह में सोया शरारती सूरज,
बस आँख खुलते ही परियों की शाल खींचता है ।
Ye sard subah me soya shararati sooraj,
Bas aankh khulte hi pariyoN ki shaal kheenchta hai

मैं होशमंद हूँ ख़ुद भी ,सो मेरी ग़ज़लों में ,
न रक़्स करता है आशिक़ न बाल खींचता है ।
Main hoshmand huN khud bhi ,so meri ghazaloN me
Na raqs krta hai aashiq, na baal kheenchta hai .

- charagh
6:56 pm

अब ये गुल गुलनार कब है? ख़ार है । बेकार है - चराग़ शर्मा

अब ये गुल गुलनार कब है? ख़ार है । बेकार है ।
आपने जब कह दिया बेकार है ।बेकार है ।

छोड़कर मतला, ग़ज़ल दमदार है , बेकार है ।
जब सिपहसालार ही बीमार है , बेकार है ।

इक सवाल ऐसा है मेरे पास जिसके सामने
ये जो तेरी शिद्दत-ए-इन्कार है ,बेकार है ।

यार हद है ! तुझको भी है ख़्वाहिशे दीदारे-माह,
इक दिए को रौशनी दरकार है ।बेकार है ।

मैकदे के मुख़तलिफ़ आदाब होते हैं चराग़
जो यहाँ पर साहिबे किरदार है , बेकार है ।

- चराग़

ab ye gul gulnar kb hai ?khaar hai .bekaar hai.
aapne jb keh diya ,bekaar hai ,bekaar hai.

chhodkar matla ,ghazal damdaar hai. bekaar hai.
jb sipahsaalaar hi bimaar hai ,bekaar hai .

ik sawal aesa hai mere paas jiske saamne ,
ye jo teri shiddat-e-inkaar hai ,bekaar hai .

yaar had hai ! tujh ko bhi hai khwahish-e-didaar-e-chaand ,
ik diye ko raushni darkaar hai . bekaar hai .

maikade ke mukhtalif aadaab hote hain charagh,
jo yahan pr sahib-e- kirdaar hai , bekaar hai .

- Chirag Sharma "charagh"
6:54 pm

कोई पहिया ख़राब चलता है - चराग़ शर्मा

कोई पहिया ख़राब चलता है ।
तो वो ठेला ख़राब चलता है ।

एक  पुर्ज़ा ख़राब  चलने से ,
कारख़ाना ख़राब चलता है ।

जानता हूँ ख़राब है वो शख़्स,
हाँ पर इतना ख़राब चलता है ।

बोला इक शहसवार," मैं देखूं ,
कौन लंगड़ा ख़राब चलता है" ।

खूब हँसिये मगर कभी न कभी
वक़्त सबका ख़राब चलता है ।

लो ये मंज़िल भी देख ली आख़िर ,
अब ये ख़ानाख़राब चलता है ।

                       - चराग़
6:51 pm

वो शेरो शायरी बस शोख़ियों पे चलती थी - चराग़ शर्मा

वो शेरो शायरी बस शोख़ियों पे चलती थी
हमारी ट्रेन तेरी पटरियों पे चलती थी
Vo shero shayari bs shokhiyoN pe chlti thi
Hamari train teri patriyoN pe chalti thi

मैं पेड़ काटके बैसाखियाँ बनाता था
मेरी दुकान भी बैसाखियों पे चलती थी
Main ped kaat ke baisakhiyaN banata tha
Meri dukan bhi baisakhiyoN pe chalti thi

ये जिनकी रानियां अब रस्सियों पे चलती हैं
इन्ही की फ़ौज कभी हाथियों पे चलती थी
Ye jinki raaniyaN ab rassiyoN pe chlti hain
Inhi ki  fauj kbhi haathiyoN pe chalti thi

मुहल्ले वालों के सब काम छूट जाते थे
जो' बहस वक़्त की बरबादियों पे चलती थी
Muhalle waloN ke sab kaam chhoot jaate the
Jo' behes waqt ki barbadiyoN pe chalti thi

वो लोग क्या हुए जो जूठे बेर खाते थे?
वो क़ौम क्या हुई जो पानियों पे चलती थी?
Vo log kya hue jo joote ber khate the?
Vo qaum kya hui jo paaniyoN pe chlti thi?

चराग़ बनते ही आंधी चली है कूज़ागर
मैं ख़ाक था तो मेरी आंधियों पे चलती थी
Charagh bante hi aandhi chli hai kuzagar
Main khak tha to meri aandhiyoN pe chlti thi

- charagh
6:49 pm

किसी को राह ने मुश्किल में डाल रक्खा है - चराग़ शर्मा

किसी को राह ने मुश्किल में डाल रक्खा है ।
किसी ने चाय का पानी उबाल रक्खा है ।
Kisi ko rah ne mushkil me daal rakkha hai
Kisi ne chaay ka paani ubaal rakkha hai

किसी को क्लास से बाहर निकाल रक्खा है।
किसी ने सीट पे रूमाल डाल रक्खा है।
Kisi ko class se bahar nikal rakkha hai
Kisi ne seat pe roomaal daal rakkha hai

किसी ने कमरे में बर्बाद कर लिया ख़ुद को,
किसी ने दश्त में अपना ख़याल रक्खा है ।
Kisi ne kamre me barbad kar liya khud ko
Kisi ne dasht me apna khyal rakkha hai

हकीम-ए-शहर के बच्चों को पालने के लिए
हर आदमी ने कोई  रोग पाल रक्खा है
Hakeem-e-sheher ke bacchoN ko paalne ke liye
Har aadmi ne koi rog paal rakkha hai

वहां वो चिड़िया भी ख़ुश है ये सोच कर, सैयाद!
कि उसने दुनिया को पिंजरे में डाल रक्खा है ।
Vahan vo chidiya bhi khush hai ye sochkar, sayyad ! 
Ki usne duniya ko pinjare me daal rakkha hai

ग़ज़ल ही इश्क़ का मैदान है,तो आगे बढ़ो!
यहाँ का मोर्चा हमनें संभाल रक्खा है।
Ghazal hi ishq ka maidaan hai to aage badho
Yahan ka morcha humne sambhaal rakkha hai

-  charagh
6:47 pm

मैं चाहता हूँ मेरा दिल दिया दिखाई दे - चराग़ शर्मा

मैं चाहता हूँ मेरा दिल दिया दिखाई दे
जो जल रहा है वो जलता हुआ दिखाई दे
Main  chahta huN mera dil diya dikhai de
Jo jal rha hai vo jalta hua dikhai de

छिपा रखे हैं ख़िज़ाँ ने तिरे नुक़ूश-ए-क़दम
हवा चले तो कोई रास्ता दिखाई दे
Chhipa rakhe haiN khizaaN ne tere nuqoosh-e-qadam
Hawa chale to koi raasta dikhai de

उसी को देखता रहता हूँ इस उमीद के साथ
कभी तो उसको मेरा देखना दिखाई दे
Usi ko dekhta rehta huN is umeed ke sath
Kbhi to usko mera dekhna dikhai de

चलो मैं ख़ुद ही निगाहों को फेर लेता हूँ
कि इससे पहले वो चेहरा बुरा दिखाई दे
Chlo maiN khud hi nigahoN ko pher leta huN
Ki isse pehle vo chehra bura dikhai de

हमारी आंखों में चुभता है रौशनी का निज़ाम
दिए बुझाओ कि सब एक सा दिखाई दे
Hamaari aankhoN me chhubhta hai raushni ka nizaam
Diye bujhaao ki sab aik sa dikhai de

- charagh

6:45 pm

वो सिर्फ़ क़िस्से कहानियों के मुआमले थे, चराग़ रख दे - चराग़ शर्मा

वो सिर्फ़ क़िस्से कहानियों के मुआमले थे, चराग़ रख दे
चराग़ घिसने से कोई जिन विन नहीं निकलते, चराग़ रख दे
Vo sirf qisse kahaniyoN ke muamle the, charagh rakh de
Charagh ghisne se koi jin vin nhi nikalte charagh rakh de

हमारी मासूमियत तो देखो ,रख आए दिल हम हुज़ूर-ए-जानां ,
कि जैसे कोई  ख़ुदा का बन्दा हवा के आगे चराग़ रख दे
Hamari masumiyat to dekho ,rakh aaye dil hum huzoor-e-janaaN
Ki jaise koi khuda ka banda hwa ke aage charagh rakh de

किसी के साए को क़ैद करने का इक तरीक़ा बता रहा हूँ ,
इक उसके आगे चराग़ रख दे ,इक उसके पीछे चराग़ रख दे ।
Kisi ke saaye ko qaid krne ka ik tareeqa bta rha huN
Ek uske aage charagh rakh de, ek uske peechhe charagh rakh de

तुझे बहुत शौक़ था मुहब्बत की गर्म लपटों से खेलने का ,
ले जल गयी ना हथेली ! अब ख़ुश? कहा था मैंने चराग़ रख दे
Tujhe bahut shauq tha muhabbat ki garm laptoN se khelne ka
Le jal gyi na hatheli, ab khush? Kaha tha maine charagh rakh de

चराग़ ले के भी ढूँढने से चराग़ जैसा नही मिलेगा ,
सो रखनी है तो चराग़ से रख , नहीं तो प्यारे चराग़ रख दे ।
Charagh leke bhi dhoondne se charagh jaisa nhi milega.
So rakhni hai to charagh se rakh, nhi to pyaare charagh rakh de.

चराग़ रौशन ज़रूर कर तू पर उससे पहले ख़ुदा की ख़ातिर,
यहाँ पे फैला है जो अँधेरा ,समेट , ज़ेरे चराग़ रख दे ।
Charagh raushan zaroor kr tu pr usse pehle khuda ki khaatir
Yahan pe phaila hai jo andhera,,, samet ! ..zer-e-charagh rakh de

मैं दिल की बातों में आ गया और उठा के ले आया उसकी पायल,
दमाग़ देता रहा सदायें "चराग़ रख दे! चराग़ रख दे!"
Main dil ki baatoN me aa gya or utha ke le aaya uski payal
Dimaagh deta rha sadaayeN, "charagh rakh de !  Charagh rakh de  !

- charagh
6:26 pm

हवा शजर ने तेरा एहतराम करते हुए - चराग़ शर्मा

हवा शजर ने तेरा एहतराम करते हुए ।
कमर कमान बना ली सलाम करते हुए ।

सवेरे बाग़ में, उसको ,ख़िराम करते हुए ।
कई गुलाब मिले राम राम करते हुए ।

तमाम रात चराग़ों के नाम करते हुए ।
किसी ने ख़ुद को डुबोया है शाम करते हुए ।

वो बच्चा जो कभी गिनता था रातभर तारे
वो आज सो गया ट्यूशन का काम करते हुए

सफ़र में रेत न धूप ,और उसपे इतने दरख़्त  !
कि लोग थकने लगे हैं क़याम करते हुए

- चराग़
6:25 pm

जला ये शहर तो सब अपना घर बचा रहे थे - चराग़ शर्मा

जला ये शहर तो सब अपना घर बचा रहे थे
हम उस घड़ी भी चराग़ों के सर बचा रहे थे
Jalaa ye sheher to sab apna ghar bacha rhe the
Hum us ghadi bhi charaghoN ke sar bacha rhe the

बचा के रक्खा उन्हें चारागर की नज़रों से
जो ज़ख़्म आबरू-ए-चारागर बचा रहे थे
Bacha ke rakkha unhe charagar ki nazaroN se
Jo zakhm aabru-e-charagar bacha rhe the

हमें ये मौत तो मंज़ूर थी, वो शर्त नहीं
हमारी जान वो जिस शर्त पर बचा रहे थे
HumeN ye maut to manzoor thi, vo shart nhi
Hamari jaan vo jis shart par bacha rhe the

बचा ही कौन था जो देखता हमें तेरे बाद
कुछ आइने थे ,सो वो भी नज़र बचा रहे थे
Bacha hi kaun tha jo dekhta humeN tere baad
Kuch aaine the, so vo bhi nazar bacha rhe the

सहर हुई तो ज़रूरत नहीं बची उसकी
वो इक चराग़ जिसे रातभर बचा रहे थे
Sahar hui to zaroorat nhi bachi uski
Vo ik charagh jise raat bhar bacha rhe the

- Charagh
6:23 pm

ऐसे लब हैं कि जो इरशाद किया जाएगा - चराग़ शर्मा

ऐसे लब हैं कि जो इरशाद किया जाएगा
ऐ बी सी डी की तरह याद किया जाएगा
Aese lab hain ki jo irshad kiya jayega
A B C D ki tarah yaad kiya jayega

दश्त अब शहर में आबाद किया जाएगा
क़ैस को ठीक से बरबाद किया जाएगा
Dasht ab sheher me aabaad kiya jayega
Qais ko theek se barbaad kiya jayega

हाए ये फूल से चेहरे कि ख़ुदा जानता था
एक दिन कैमरा ईजाद किया जाएगा
Haye ye phool se chehre ki khuda janta tha
Aik din camera eijaad kiya jayega

उसी रौज़न में से उग आएगी इक राह-ए-फ़रार
जिससे बिनाई  को आज़ाद किया जाएगा
Usi rauzan me se ug aayegi ik raahe farar
Jisse binaai ko aazaad kiya jaega

याद भूले हुए लोगों को किया जाता है
भूल जाओ कि तुम्हें याद किया जाएगा
Yaad bhoole huye logoN ko kiya jata hai
Bhool jao ki tumhe yaad kiya jayega

~ Charagh
6:21 pm

कफ़न से काफ़ हटाना है फ़न बनाना है - चराग़ शर्मा

कफ़न से काफ़ हटाना है फ़न बनाना है
हमारा काम दुखन को सुख़न बनाना है
Kafan se kaaf htana hai fan bnana hai
Hmara kaam dukhan ko sukhan bnana hai

शतक बनाने को बस एक रन बनाना है
वो दोस्त बन गई है अब दुल्हन बनाना है
Shatak bnane ko bas ek run bnana hai
Vo dost ban gyi hai ab dulhan bnana hai

बरहनगी से कोई पैरहन बनाना है
किसी बदन को लिबास-ए-बदन बनाना है
Brahangi se koi pairahan bnana hai
Kisi badan ko libas-e-badan bnana hai

फिर उसके बाद का सब काम तितलियों के सुपुर्द
तुम्हें तो बाग़ बनाने का मन बनाना है
Phir uske baad ka sab kaam titliyoN ke supurd,
Tumhe to baagh bnane ka man bnana hai

किसी की रूह को झुलसा न दे वो नर्म लिहाफ़
जो इक ग़रीब को नंगे बदन बनाना है
Kisi ki rooh ko jhulsa na de vo narm lihaaf
Jo ik ghareeb ko nange badan bnana hai

~ Charagh
6:18 pm

तुम्हारा क्या है, तुम्हें सिर्फ़ ज्ञान देना है - चराग़ शर्मा

तुम्हारा क्या है, तुम्हें सिर्फ़ ज्ञान देना है
हमारी सोचो हमें इम्तिहान देना है
Tumhara kya hai, tumheN sirf gyaan dena hai
Hamari socho, humeN imtihaan dena hai

मुसव्विरो ! अब उन आंखों पे ध्यान देना है
नहीं तो तुमने ये काग़ज़ भी सान देना है
Musavviro!  Ab un aankhoN pe dhyaan dena hai
Nhi to tumne ye kaghaz bhi saan dena hai

तेरा सवाल ,मेरी जान का सवाल है और
जवाब देने से आसान जान देना है
Tera sawal, meri jaan ka sawal hai, aur
Jawab dene se aasaan jaan dena hai

गुलाब भी हैं ,गुलाबों में ख़ार भी हैं, बता !
निशानी देनी है या फिर निशान देना है?
Gulab bhi haiN, gulaboN me khaar bhi haiN, bta
Nishani deni hai ya phir nishan dena hai

उन्होंने अपने मुताबिक़ सज़ा सुना दी है
हमें सज़ा के मुताबिक़ बयान देना है
Unhone apne mutabiq sazaa suna di hai
Hume sazaa ke mutabiq bayaan dena hai

ये बेज़ुबानों की महफ़िल है दोस्त, याद रहे
यहाँ ख़मोशी का मतलब ज़बान देना है
Ye bezubanoN ki mehfil hai dost, yaad rhe
Yahan khamoshi ka matlab zabaan dena hai

- charagh
6:16 pm

अब भी ये मसरूफ़ दुनिया सुस्त है रफ़्तार में - चराग़ शर्मा

अब भी ये मसरूफ़ दुनिया सुस्त  है रफ़्तार में
कल की ख़बरें पढ़ रही है आज के अख़बार में
Ab bhi ye masroof duniya sust hai raftaar me
Kal ki khabareN padh rahi hai aaj ke akhbaar me

एक घर की चार दीवारी में गुम हैं दो मकान
रोज़ ईंटें उग रही हैं पांचवी दीवार में
Aik ghar ki chaar deewari me gum hain do makaan
Roz iinteN ugg rahi haiN panchvi deewaar me

उस हसीं चहरे पे क़ाबिज़ ज़ुल्फ़ से लड़ना है तो
आइने से धार करिए धूप की तलवार में
Us haseeN chehre pe qaabiz zulf se ladna hai to
Aaine se dhaar kariye dhoop ki talwaar me

इनके अंदर मौत का डर डाल , ये मासूम लोग
सुनते आए हैं कि सब जाइज़ है जंग और प्यार में
Inke andar maut ka dar daal, ye masoom log
Sunte aaye hain ki sab jaaiz hai jung aur pyaar me

- Charagh
6:14 pm

औरों की प्यास और है और उसकी प्यास और ....चराग़ शर्मा

औरों की प्यास और है और उसकी प्यास और ।
कहता है हर गिलास पे "बस इक गिलास और"।

पहले ही कम हसीन कहाँ था तुम्हारा ग़म,
पहना दिया है उसको ग़ज़ल का लिबास और ।

टकरा रही है सांस मेरी उसकी सांस से ,
दिल फिर भी दे रहा है सदा "और पास...और" ।

अल्लाह! उसका लहजा-ए-शीरीं कि क्या कहूँ!
वल्लाह! उसपे उर्दू ज़ुबां की मिठास और ।

बाँधा है अब नक़ाब तो फिर कसके बाँध ले ,
इक घूँट पीके ये न हो बढ़ जाए प्यास और ।

ग़ालिब हयात होते तो करते ये ऐतराफ़,
दौर-ए-चराग़ में है ग़ज़ल का क्लास और।

-चराग़
6:09 pm

मैं चाहता हूँ मेरा दिल दिया दिखाई दे - चराग़ शर्मा

मैं चाहता हूँ मेरा दिल दिया दिखाई दे
जो जल रहा है वो जलता हुआ दिखाई दे

उसी को देखता रहता हूँ इस उमीद के साथ
कभी तो उसको मेरा देखना दिखाई दे

ज़मीन यूंही समंदर से तरबतर नहीं की ,
वो चाहता था हमें आइना दिखाई दे

नज़र से कम तो नहीं उंगलियों की बीनाई ?
ये चीज़ अंधे को देखें कि क्या दिखाई दे

ये लोग आंखों को पत्थर बना के छोडेंगे
अगर कहीं पे ज़रा सा ख़ुदा दिखाई दे

छिपा रखे हैं ख़िज़ाँ ने तिरे नुक़ूश-ए-क़दम
हवा चले तो कोई रास्ता दिखाई दे

हमारी आंखों में चुभता है रौशनी का निज़ाम
दिए बुझाओ कि सब एक सा दिखाई दे

- चराग़

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