हिंदी साहित्य वैभव

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बुधवार, 26 जुलाई 2017

4:53 am

हरियाली तीज

हरियाली तीज दोहे-

घर में नव व्यंजन बनें, खाना लगे लजीज ।
सावन आये बरसता, तब हरियाली तीज।।

हाथों में रच मेंहदी, सखियाँ गाये गीत ।
सबके सजन घर आये, तुम भी आना मीत ।।

खनकती नयी चूड़ियाँ, मेंहदी रची हाथ
करें संगिनी कामना, साजन रहना साथ ||

विकास भारद्वाज "सुदीप"
26 जुलाई 2017

शनिवार, 22 जुलाई 2017

4:17 am

बस एक ख्याल तुम्हारा

ये ख्याल भी न जाने कैसा ख्याल है
खोया रहता हूँ तुम्हारे ख्यालों में,
तेरी चाहत जो अक्सर खींच लेती है
मुझको तेरी ओर।
डूबा सा जाता हूँ तुझमें इस कदर,
कि ख्याल ही नहीं रहता कि क्या हो रहा मुझको।
कह दो इन ख्यालों से कि यूँ न सताए मुझे,
अच्छा लगता है, बस एक ख्याल तुम्हारा
ये सुबह ,सर्द हवा और ये सुहाना मौसम
याद दिलाते हैं वो लम्हें
अक्सर उन लम्हों की यादों में
मायूस होने लगता हूँ
फिर??
अच्छा लगता है
बस एक ख्याल तुम्हारा
क्या है वो ख्याल ?
वो ख्याल कुछ ऐसा है,
तुमको सोचना, बीते लम्हे याद करना
जहाँ हर दर्द खूबसूरत लगता है ।
वो ख्याल इन सर्द हवाओं में कुछ यूँ आता है
और लबों मे मुस्कान ला देता है
एक अजीब सी बात है तुझमें,
जो हमेशा से पास बुलाती तुझको,
मेरे सपनों में।
चाहने लगा हूँ इस कदर तुझको,
समझ ही नहीं आता मुझे खयाल कोई और।
कि मिलोगी तुम मुझे कहीं इन ख्यालों के किसी अनजानें मोड़ पर।।
कभी भूल न जाना मुझको सनम
मेरे ख्यालों में सिर्फ तुम हो.......सिर्फ तुम हो

✍विकास भारद्वाज 'सुदीप'
22 जुलाई 2017

गुरुवार, 20 जुलाई 2017

8:34 am

रिश्तों की संजीवनी में बुजुर्गो की भूमिका

रिश्तों की संजीवनी में बुजुर्गो की भूमिका

रिश्तों की संजीवनी बूटी बन जाते है, हमारे
घर के बुजुर्ग
कांपता हाथ सिर पर रखते ही, रास्तों के पत्थर हटा देते हैं, घर के बुजुर्ग।
हमेशा बुजुर्गों की छत्रछाया में ही महफूज
रहते है हम सब
देकर मशविरा तहजीब का, एक तजुर्बा बन जाते हैं, घर के बुजुर्ग ।।

हमारा हौसला, हमारी ख्वाहिश, ताकत बढाते हैं, घर के बुजुर्ग
अपने खून पसीने रूपी खाद से सींच कर पल्लवित करते है, घर के बुजुर्ग
गलत व्यवहार से उनके आत्म-सम्मान को ठेस ना देना कभी तुम
कभी होते हम उलझन में, तब प्यार से समझाते है घर के बुजुर्ग ।।

विकास भारद्वाज 'सुदीप'
20 जुलाई 2017

सोमवार, 5 जून 2017

7:42 am

विषय- पर्यावरण संतुलित कैसे हो ?

🍀☘🌱🌳🌴
पर्यावरण का तात्पर्य है सभी प्राकृतिक हमारा परिवेश जैसे की भूमि, वायु, जल, पौधें, पशु, ठोस सामग्री, कचरा, धूप, जंगल और अन्य वस्तु।
स्वच्छ वातावरण प्रकृति के संतुलन को बनाए रखता है । और साथ ही साथ पृथ्वी पर सभी जीवित चीजों को बढ़ने, और प्राणीयों को विकसित करने में मदद करता है। हालांकि अब कुछ तकनीकी उन्नति के परिणाम में मानव द्वारा निर्मित चीजे वातावरण को कई प्रकार से विनाश कर रहीं हैं जो कि प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ रही है।
जैसे गंगा मे कचरा हो जाने से जल दूषित हो रहा है हम अपने जीवन को साथ ही साथ इस ग्रह पर भविष्य में जीवन के अस्तित्व को खतरे में डाल रहे हैं| पेडों का कटान अंधाधुंध तरीके से चल रहा है पेड पौधो का रोपण कम हो रहा है
फैक्टीयों से निकलने वाला कचरा नाले द्वारा नदी में छोडने से तमाम रोग फैल रहे है । पेड पौधे सूख कर खत्म हो रहे है वाहनों द्वारा निकलने वाला धुआँ प्रदूषण हो रहा है
इसके लिए गैस से संचालित वाहन चलाने चाहिए
एवं प्रदूषण जाँच केन्द्र पर जाकर जाँच करानी चाहिए

संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा विश्व स्तर पर  पर्यावरण संतुलन करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए जिससे आगे चलकर मनुष्य को परेशानी का कारण न बनें
यदि हम प्रकृति से छेडछाड गलत तरीके से कुछ भी करते हैं तो ये पूरे वातावरण के माहौल जैसे की वायु-मंडल, जलमंडल और स्थलमंडल  को विनाश की ओर ले चलते है। प्राकृतिक वातावरण के अलावा, मानव द्वारा निर्मित वातावरण भी मौजूद है जो की प्रौद्योगिकी, काम के माहौल, सौंदर्यशास्त्र, परिवहन, आवास, सुविधाएं और शहरीकरण के साथ सम्बंधित है| मानव निर्मित वातावरण काफी हद तक प्राकृतिक वातावरण को प्रभावित करता है जिसे हम सभी एकजुट होकर बचा सकते हैं ।

प्राकृतिक वातावरण के घटक संसाधन के रूप में उपयोग किया जाता है जीवन के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए इंसान द्वारा इसका शोषण किया जा रहा है। हमें हमारे प्राकृतिक संसाधनों को चुनौती नहीं देनी चाहिए और पर्यावरण में इतना प्रदूषण या अपशिष्ट पदार्थ डालने में रोक लगानी चाहिए। हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों को महत्व देना चाहिए और प्राकृतिक अनुशासन के तहत उन्हें इस्तेमाल करना चाहिए।
लोगों को अधिक से अधिक प्रेरित करना चाहिए कि गंदगी करने से बीमारीयाँ फैलती है इसलिए अपने आस पास के परिवेश को स्वच्छ रखें और *स्वच्छ भारत निर्मल भारत*   अभियान में योगदान दें

*✍विकास भारद्वाज "सुदीप"*
*5 मई 2017*

मंगलवार, 9 मई 2017

8:59 pm

निर्भया : सपना डाॅ. बनना था, चंद पलों में टूटा था । - विकास भारद्वाज

विजया घनाक्षरी

कछुआ गति इंसाफ, असर न्याय का हाफ।
निर्भया के माँ बाप के,जज्बे को नमन करो।।

सशख्त कानून दिला, बेटी को न्याय मिला ।
कोर्ट का निर्णय मान्य,दरिंदो अब तो डरो ।।

दरिंदों को दे फाँसी, न्याय की आस जागी ।
तुम्हे है जीना धिक्कार, फंदे पे लटक मरो ।।

सपना डाॅ. बनना था, चंद पलों में टूटा था ।
तुम्हे याद है वो दिन,न अब याचिका भरो ।।

विकास भारद्वाज "सुदीप"
6 मई 2017


शनिवार, 6 मई 2017

10:00 am

गजल

गजल क्र○ 4

तुम्हारे पढे खत जमाना हुआ
मिले बाद वर्षों फसाना हुआ

सताती मुझे याद शामों-सहर
जख़म आज मेरा पुराना हुआ

मुझे देख पलकें झुका के मिली
हमारा सफ़र भी सुहाना हुआ
                  
किये यूँ पराये वफा से मुकर
उसे छोड आँसू बहाना हुआ

कभी इश्क का भी चढा था जुनूं
बिछड के कही ना ठिकाना हुआ

विकास भारद्वाज "सुदीप"
04/05/2017

सोमवार, 24 अप्रैल 2017

6:33 am

हाइकू- पानी

जल जीवन
यूँ व्यर्थ न बहाओं
मूल आधार

जल दूषित
रोग फैलते जब
सचेत रहो

गगन मेघा
बूँद बन बरसे
सावन भादों

झरना बन
नदी में जल बहें
पहाडों बीच

बारिश आयी
तिरक्षी तेज बूदें
बहार छाई

विकास भारद्वाज "सुदीप"
9627193400              24/04/2017

रविवार, 23 अप्रैल 2017

12:21 am

लघुकथा:- नारायणी

एक महिला थी उसका नाम नारायणी अर्थात् लक्ष्मी I उसके तीन बेटे और बेटियाँ थी सभी का विवाह हो चुका था और सभी बेटे अपना नया मकान बनाकर रहने लगे जिनमें उसका सबसे बडा बेटा उमेश केन्द्रीय कर्मचारी था । उमेश के दो बेटे थे वो अमेरिका मे विवाह कर वही के निवासी हो गये और उमेश से छोटा भाई अरविन्द प्राथमिक विधालय में शिक्षक था और नारायणी का सबसे छोटा बेटा अपना विजनिश  करता था I
नारायणी अब वक्त के साथ बूढी होने लगी बुढापा एक ऐसा कडवा सच है जिसे हर
  प्राणी को आना है समय बीतता गया अब वो बूढी माँ कमजोर और चलने फिरने में असमर्थ होने लगी I उसके बेटे उसको अपने पास रखने से कतराते थे आज के जमाने में ऐसा लगता है कि पैसे की अमीरी आने पर लोग अपने माँ बाप को ही भूला देते है उनको पैसो के अलावा कुछ नही दिखता I
लेकिन उस बुढी माँ को घर से निकाल दिया आज वही लोग समाज में खुद की शक्सयित को बडा दिखाने के लिए रिश्तों को तार तार कर देते है ऐसा कुछ नारायणी के साथ हुआ आज वो इधर-उधर रहकर बुढापा काट रही है  उस बुढी महिला की स्मरण शक्ति भी उम्र के साथ कम होने लगी उसके बेटे आँखों का चश्मा तक नही बनबा सके वो अपने बेटों और बहुओं के ताने और रोकटोक से परेशान हो गयी । उसके बेटे ही नही ना जाने कितने लोगों के किस्से जमाने में देखनो को आज भी मिल रहे है ।
माँ क्या होती है समझ जाओगे शायद तुम भी किसी रात को सबके खाने के बाद एक दिन रसोई में अपना खाना खुद ढूढों माँ तो वो भगवान है जिसे बुखार भी हो जाये और उसके बेटे को पता चले तो पता है क्या कहेगी कि बेटा खाना बना रही थी ना इसलिए गर्म हूँ I
गरीबी थी जो सबको एक आंचल में सुला देती थी
,
अब अमीरी आ गई तो सबने अलग मक़ान बना लिए I
लोग न जाने क्यूँ अपने हिन्दुस्तान की संस्कृति और सभ्यता को भूलते जा रहे है I


मेरी यह कहानी पूर्णतः मौलिक
, अप्रकाशित एंव अप्रसारित है।
©विकास भारद्वाज "सुदीप"
कस्बा-  मेन चौराहा खितौरा
बदायूँ-
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दूरभाषा- +91 9627193400
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ब्लॉग/साइट- www.vbsudeep.blogspot.in

शनिवार, 22 अप्रैल 2017

5:28 am

◆ जलहरण-घनाक्षरी ◆ विश्व पृथ्वी दिवस

पेडों को खूब लगाओ
भूमि से सोना उगाओ
पर्यावरण स्वच्छ हो
बीमारी से मुफ्त तन ।
                              नदी में दवा न छोडों
                              पेडों का दोहन रोकों
                              धरा पर फूल खिलें
                              शुद्ध हो मानव मन ।।
मलबा डालों खेतों में
कूडा न फेंक नालों में
दूषित जल से रोग
जल सदुपयोग कर ।
                              जीवन है जीना होगा
                              वन को बचाना होगा
                              जागरुक बन अब
                              प्रकृति की रक्षा कर ।।

विकास भारद्वाज "सुदीप"
9627193400               21/04/2017

मंगलवार, 11 अप्रैल 2017

1:19 am

गंगा (सफाई)ऐक्शन प्लान/ठोस एवं जैव औषधीय कचरा प्रबंधन विधा- निबन्ध

विधा- निबन्ध

गंगा नदी भारत की प्राचीन नदियों में से एक है और इसका अपना एक इतिहास है ।
यह नदी सब भारतीयों की एक आस्था का भी प्रतीक माना जाता है इससे हमारी पहचान है
इसलिए यह सिर्फ एक नदी नहीं है।
यह नदी हिमालय की गोद से निकल कर मैदानी इलाको में आती है।

इन नदियों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है क्योंकि इन नदियों से ही भूमि उपजाऊ बनती है। इसके इलावा इन नदियों के पानी से हमारी दिनचर्या भी पूरी होती है जैसे की पीने के लिए,नहाने के लिए, पेड़-पौधों के लिए,जीव-जंतुओं के लिए आदि ।

अब ये नदी प्रदूषित हो गई है । आज के समय में गंगा को मैली करने में हम सब का बहुत योगदान है। बच्चे के मुंडन से ले के की राख को इस गंगा नदी में बहाया जाता है।
तथा घर में होने वाले धार्मिक कार्यो की चीजे गंगा माँ की गोद में डाल देते है  इसके इलावा शहर का सारा गंद और कारखानो से निकलने वाले जहरीले पदार्थ और रसायन भी इस नदी में बहा दिए जाते है। अब इस गंगा नदी का पानी पिने लायक भी नहीं रहा है ।

सरकार और कई संस्थाये इसे साफ़ करने के कई उपाय निकाल रही है और तो और हर साल इसे साफ़ करने के लिए करोडों पैसे खर्च किये जाते है परन्तु इसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा और अगर इस नदी का यही हाल रहा तो एक दिन ये नदी का पानी पूरी तरह से प्रदूषित हो जयेग।
हम सबको प्रण लेना चाहिए की हम इसे साफ़ रखने में अपना पूरा योगदान दे।

©विकास भारद्वाज "सुदीप"
9627193400          10/04/2017

सोमवार, 10 अप्रैल 2017

6:37 am

गंगा स्वच्छता/नमामि गंगे

विधा-तुकांत
नदियों का नहीं कोई रखवारा
हरा भरा स्वच्छ हो जग सारा
पापियों का हो उद्‌धार जिससे
पवित्र निर्मल बहती गंगा धारा

जन-जन में जब आस जागाएगा,
फिर यूँ गंदगी न कोई फैलाएगा।
जब मुर्दाघाट जब अलग बनेगा
तब कोई लाश नहीं दफनाएगा।

मति मारी छोडते कचरा सारा
नाले में फैक्ट्री का मलबा सारा
कीटाणुओं का संक्रमण फैलता
पवित्र निर्मल बहती गंगा धारा
©विकास भारद्वाज "सुदीप"
9627193400           10/04/2017

गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

12:54 am

गजल:- इरादा जो किया उसको मुझे अब दिखाना है

गजल क्र○ 3

बह्र- 1222×4
इरादा जो किया उसको मुझे अब दिखाना है
मुहब्बत में मिला गम है वफा यूँही निभाना है
ढहाये जो सितम उसने अभी तक इस मुहब्बत में              
जिगर घायल हुआ मलहम उसे ही अब लगाना है
अगर उसको तर्के-उल्फत फ़साना था मुहब्बत में
जुदा होके सहर संगदिल-फरेबी को भुलाना है
बिछड जाओ बहारेँ भी कही होगी मुहब्बत में
उसी से प्यार है हमको गले उसको लगाना है ।
वो खुद ही चाँद है श्रृंगार की उसको जरूरत क्या
मुझे तो अब तुम्हारे खत कलम-ए-खूं लिखाना है
यही सोच ले डूबेगी उसे खुद पे गुमाँ रहा
मुझे तो अब सनम तन्हा सोच अश्कों को बहाना है
चलो उससे नया दर्द मिला हमदम खुशी से अब,,
नहीं कल हो ज़िंदा हमको खुदा के पास जाना हैं,,
©विकास भारद्वाज "सुदीप"

शनिवार, 1 अप्रैल 2017

6:12 am

गजल:- मुहब्बत लुटाने के दिन आ रहे है

गजल क्र○ 2

मुहब्बत लुटाने के दिन आ रहे है
नजर को चुराने के दिन आ रहे है
तुम्हारी निगाहें मुण्डेरे पे अटकीं
कबूतर उडाने के दिन आ रहे है
तुम्हारा बदन पैरहन ये गुलाबी
अदाऐं दिखाने के दिन आ रहे है
खतों से खुलासा हुआ है तुम्हारे
कि डोली सजाने के दिन आ रहे है
सितारें जमीं पे सुदीप ले उतारो
उन्हें आजमाने के दिन आ रहे है
©विकास भारद्वाज "सुदीप"
9627193400           28 मार्च 2017
5:56 am

मुक्तक- जीवन एक चुनौती

जीवन भर लक्ष्य चुनौती रहता है
जीवन दुखमय गागर मे रहता है
मंजिल मिल जाये संघर्ष करने से
जीवन सुखमय सागर में बहता है

©विकास भारद्वाज "सुदीप"
  9627193400           1 मार्च 2017

मंगलवार, 28 मार्च 2017

1:50 am

कविता- वो है मेरी प्यारी माँ

मेरे सपनों को सहलाती है माँ
जिद्द करने पर बहलाती है माँ
घर में नये पकवान बनाये जो
वो है मेरी प्यारी माँ।

आँचल की छाँव में रखती है माँ
मेरी चोट पर हल्दी रखती है माँ
घर में सबकी चिन्ता करती जो
वो है मेरी प्यारी माँ।

अपने रोते बच्चों का पलना है माँ
गंगा-जमुना का मीठा झरना है माँ
मेरे रूठने पर प्यार से मनाये जो
वो है मेरी प्यारी माँ

जब नई नई कहानी सुनाती है माँ
दूर होने पर फोन से बुलाती है माँ
शैतानी पर भी डाँटकर हँसाये जो
वो है मेरी प्यारी माँ

अपने दुख को समेटे रखती है माँ
मेरी आँखों में काजल रखती है माँ
अपनी ममता का रस बरसाये जो
वो है मेरी प्यारी माँ।

©विकास भारद्वाज "सुदीप"
   9627193400          27 मार्च 2017

सोमवार, 27 मार्च 2017

4:14 am

गजल :-तुम्हारे सितम को सहन कर रहा हूँ

गजल क्र○ 5

तुम्हारे सितम को सहन कर रहा हूँ
जिगर का तलातुम दफन कर रहा हूँ
नशीली निगाहों से घायल हुये जब
जखम को छुपाकर कफन कर रहा हूँ
चमन में गुजारे खुशी के हसीं पल
तुझे मैं भुलाने का जतन कर रहा हूँ
तुम्हारे पुराने खतों को जलाकर
सुबह की हवा में मनन कर रहा हूँ
पुराने जखम पर दवा को लगाकर
लिबासे जिस्म को तपन कर रहा हूँ
©विकास भारद्वाज "सुदीप"
    26 मार्च  2017

सोमवार, 20 मार्च 2017

5:00 am

“विश्व गौरैया दिवस”- 2017

जब आंगन में गौरैया चहचहाहट से लुभाती है
प्यारी गौरैया फ़ुदक-फ़ुदक मन को सुहाती है        
सब मिलकर गौरैया और बिटिया को बचाओ
जब नन्हीं गौरैया तिनकों का जाल बिछाती है

सबसे नज़र चुरा फ़ुदक कर दाना उठाती है
प्यारी गौरैया सब बच्चो के मन को भाती है
ये नन्ही चिड़िया धीरे-धीरे गायब होने लगी
प्यारी गौरैया कच्चे घर में घोंसला बनाती है

©विकास भारद्वाज "सुदीप"
   20 मार्च 2017

रविवार, 19 मार्च 2017

1:28 am

उत्तर प्रदेश- "योगी राज" कविता- वीर रस

गुन्डागर्दी बन्द करो,यूपी में जब से जोगी है
भ्रष्टाचार बन्द करो ,यूपी में अब से योगी है ।।
महाराष्ट्र में देवेन्द्र, यूके में त्रिवेन्द्र हुये सिद्ध
संन्यासी के हाथ में सत्ता योगी हुये प्रसिद्ध ।।
यूपी में ज्यादा रोगी है इनका इलाज योगी है
राज्यों में सुशासन है देश में जब से मोदी है ।।
देशद्रोहीयों,चोर-गुन्डों से जनता जब रोती है
हर नाकाम सरकारें अपनी सत्ता तब खोती है ।।

©विकास भारद्वाज "सुदीप"
   9627193400
 

बुधवार, 15 मार्च 2017

10:21 pm

गजल:- चाहत ए इश्क

गजल क्र○ 1

उसको जब मोहब्बत निभानी नही थी
उसको चाहत ए इश्क दिखानी नही थी

बडी मुश्किल से सीखा है तेरे बगैर जीना
इस दिल को मोहब्बत सिखानी नही थी

तुमसे सनम गिले-सिकबे दूर कैसै करे
दिल की हर बात तुमको बतानी नही थी

मुझको शामो-शहर तेरी याद आयेगी
फितरत  जालिम को आजमानी नही थी

जिन्दगी एहसासो की पटरी पर दौडती
वफा की रिवाज शहर में चलानी नही थी

तकिया कही, जुल्फे कही ,वो खुद कही
अब विकास वो आँखों में तरानी नही थी

©विकास भारद्वाज "सुदीप"
   5/03/2017

सोमवार, 13 मार्च 2017

12:14 am

होली/रंग


केसरिया गुलाल अम्बर से बरसा ऐसा पानी
नशीली आँखें गुलाबी गाल हर सूरत हरषानी

देखो छोटू भी भर लाया पिचकारी रंग वाली
गुडिया भी ले आई रंग-बिरंगे रंग की थाली

आया मौसम रंगने का कर दो धरती लाल
देवर ने लगाया भाभी के गालों पर गुलाल

घर-गली में ढम-ढम ढोल बजाते होली पर
होकर मस्त अबीर गुलाल उड़ाते होली पर

हमने भी खेली थी उनके संग उसदिन होली
फिर नही कर पाये उनके संग हँसी ठिठोली

अब तुम बोलो में किसके संग खेलूँ होली
जब सुना है मैनें वो किसी और की होली

जब पीकर भाँग हुडदंग किया इस होली
वो भी खिडकी से झाकनें लगी इस होली

सब मिल मिटा दो मतभेदों को इस होली
प्यारे फूल खिला दो गुलशन में इस होली

©विकास भारद्वाज "सुदीप"
   9627193400
   13/03/2017

रविवार, 12 मार्च 2017

5:35 am

फागुन/होली- सायली छंद

1
होली
पर्व आया
घर तुम आये
गुलाल संग
प्रीतम

2
कपडे
रंग बिरंगे
बन गये पकवान
खाओ मीठा
पान

3
साजन
तुम बिन
सब फीकी होली
देखती राह
गली

4
सबको
लगादो रंग
आओ बच्चों खेले
प्यार के
रंग

5
हर
रंग बेहद
ख़ूबसूरत लगता है
हो खुशियाँ
घर

6
भंग
पिला कर
मस्ती में खेलेगें
मिटा सब
दोष

7
आया
फागुन महिना
करलो होली हुडदंग
पिचकारी भर
संग

©विकास भारद्वाज "सुदीप"
12/03/2017

शुक्रवार, 10 मार्च 2017

5:28 am

●मुक्तक- महफिल ए इशारा●

महफिल ए यार में देख हमें इशारा करती हो
सबसे नजर बचा आँखो से गवारा करती हो
मुझको छुपकर देखना तेरा बदनाम न कर दे
हमसे क्यू रूठ कर खुद से किनारा करती हो

©कवि विकास भारद्वाज "सुदीप"
05/03/2017

5:16 am

●मुक्तक- काजल-कलंक●


जब शबनमी आँखो मे वो काजल लगाती है
ना जाने कितने आरमाँ वो दिल में जगाती है
कंलक लगे ना आँचल पर यूही वफा निभाना
सदा पास है वो मुझको ये एहसास कराती है

©विकास भारद्वाज "सुदीप"
   10/03/2017

बुधवार, 8 मार्च 2017

12:09 am

●मेरे प्यारे वतन हिन्दुस्तान की शान है नारी ●

विज्ञान व तकनीकी को अब सिखाती है नारी ।
समाज व राष्ट्र को मजबूती दिखाती है नारी ।।
सीता, सती - सावित्री जैसी पूज्यनीय नारी                
पति - पत्नी  में  विश्वास  की  डोर  है नारी ।।

जन्म देती है, और बोलना सिखाती है नारी ।
खुद का सुख छोड बच्चों को पालती है नारी ।।
भाई-बहन के अनोखे बंधन में रहती हो तुम
अपने बच्चों के लिए ममता का सागर है नारी ।।

मेरे प्यारे वतन हिन्दुस्तान की शान है नारी ।
घर की सुख समृध्दि,परिवार का मान है नारी ।।
घर का काम बिना रूके करें,ना करे विश्राम
अबला नही मैदान में संग्राम का नाम है नारी ।।

घर-आँगन की शान, शक्ति की धारण है नारी ।
लक्ष्मीबाई बन देश-धर्म की रक्षा करती नारी ।।
दुनिया में बहन,माँ-बेटी,पत्नी के रूप हो तुम
एक ही सिक्के के दो पहलु हैं पुरुष और नारी ।।

©विकास भारद्वाज "सुदीप"
 9627193400                                     
 08 मार्च 2017


रविवार, 5 मार्च 2017

12:28 am

♡बसंत का मौसम♡

पेडों पर नयी शाखाऐं और फूलों की डाली ,
खेतो मे लहराती सरसो और गेहूँ की बाली
हर तरफ खुशहाली बंसत के मौसम में
हल्की ठंण्क का सुहानी मौसम आ गया ।।

हर तरफ सुर-संगीत लहरमय वीणावादन
माता सरस्वती का संगीतमय अभिवादन ।
पतझड बीता, हर तरफ हरियाली छाई
नर्म हवा, कच्ची धूप का मौसम आ गया ।।

प्रकृति की सुन्दरता से तन मनमोहक हुआ,         बहती नदियाँ,आसमां में बादल छाया हुआ ।
नयी जगह घूमने,बागों में खेलने के दिन आये
रंग-बिरंगी पतंगे उड़ाने का मौसम आ गया ।।

धूप-छाँव के बहाने सूरज धरती को सजाने
अब ऋतुराज को बसंत रंगीन परवेश बनाने
सदाबहार गीत प्रेम के प्रीतम को सुनाने
सुख-सम्रद्धि को बढाने देखो बसंत आ गया ।।

©विकास भारद्वाज "सुदीप"
01/02/2017

12:27 am

वीरों को मेरा सलाम

विश्व में हर क्षेत्र मे देश का नेतृत्व करते है
हम भारत के युवा गुगल में भी कदम रखते है
पहन कफन सिर पे सीमा की रक्षा करते है
सो गये तिरंगा ओढ़ वीरों को नमन करते है।।

हमें वीरों तुम्हारे काम पर जरा भी शक नही है
औकात में रहे जो सेना से सबूत माँगते है
सरहद पर दुश्मन को मुँह तोड जवाब देते है
ऐसे भारत माता के वीरों को सलाम करते है।।

हर मिशन को अंजाम बडी खुद्दारी से देते है
सिने पे गोली खा कर जान नौछावर करते है
वतन के लिये जान निसार बार बार करते है
लौट के आना वीर सपूत हम इंतज़ार करते है।।

©विकास भारद्वाज "सुदीप"
मोबा.- 9627193400

12:25 am

●एक नयी सुबह●


सुबह मंदिर की घंटी आरती की थाली है
सुबह नदी के किनारे सूरज की लाली है
सुबह की ख्वाहिशें शाम तक टाली है,
कुछ इस तरह हमने जिंदगी संभाली है

शमा में इस वहम में सो गये हम परवाने
कहीं आम न हो जाए बात, नींद खोली है
चिडियों की फिजा में प्रेम मधुर वाणी है
उठते हुए सूरज से नजर मिलने वाली है
छुयेंगे आसमां को हम एक रोज देखना है
ये लहूलुहान परिंदे उड़ान जारी रखना है

सूरज की किरणों में हवाओं का बसेरा
खुले इस आसमान मे सूरज का चेहरा
नयी सोच नयी उम्मीद रोशनी लायी है
फिर से नये सपनों का सबेरा लायी है

©विकास भारद्वाज "सुदीप"
   03 मार्च 2017

12:23 am

इश्क में पागल दीवानी लडकी

लहरें मुहब्बत की तुम्हारे दिल से उठती हो
किसी के इश्क मे पागल दीवानी लगती हो
जिसको एक नजर निगाहो में देख लेती हो                          
कयामत तक उस दिल को होश नही देती हो

फिजाओं में तुम हो इन घटाओं में तुम हो
इन हवाओं में तुम हो इन बहारों में तुम हो
नर्म धूप में तुम हो पेडो की छाँव में तुम हो
मेरे डायरी के हर अल्फाज गजल में तुम हो

कश्मीरी बर्फीली हसीन सर्द रात सी तुम हो
शर्मीली आँखो से मासूम लडकी दिखती हो
जब भी पथ पर मुस्कराके इतराके चलती हो
उस बाग मे सुन्दर गुलाब की कली लगती हो

©कवि विकास भारद्वाज "सुदीप"
     9627193400
25 फरवरी 2017

12:21 am

नेह दिवस/पावन-प्रीत/देश-प्रेम/मातृ-पितृ दिवस

१४ फरवरी
विषय-

हर प्राणी अपनी जन्मभूमि से जुड़ा होता है। वह उससे अलग अपने अस्तिव को पूर्ण नहीं मानता। मनुष्य कहीं भी चला जाये, विदेशों में उसे कितनी ही सुख मिले, वह वापस अपने देश आना चाहता है। वह अपना देश, अपनी संस्कृति कभी नहीं भूलता।

मनुष्य की तरह ही पशु पक्षी भी अपनी प्रेम-पावन के स्नेह बंधन एवं आकर्षण में बंधे होते हैं। पक्षी या पशु सारा दिन दाना पानी की खोज में यहाँ वहाँ घूमते जरूर हैं, पर रात को पक्षी अपने घोंसलों और पशु अपने खूँटें पर पहुँच जाते हैं

इतिहास देशभक्तों के बलिदान की गाथाओं से भरा पड़ा है। सभी देशों में देशप्रेमियों को सम्मान और स्नेह मिलता है। हमारे देश के कवियों और साहित्यकारों ने शहीदों और देश पर मर मिटने वाले देशभक्तों की अमर गाथाओं को जी खोल कर लिखा है।
भारत ने इन्टरसेप्टर मिसाइल का सफल परीक्षण कर दुश्मन को प्रेम का संदेश दिया है,
देशभक्ति के उदाहरण केवल ये शहीद ही नहीं हैं। देश का नाम सारे विश्व में रोशन करने वाले वैज्ञानिक, खिलाड़ी, कवि और लेखक भी महान देशभक्तों की श्रेणी में आते हैं। ऐसे समाज सुधारकों, कलाकारों और समाज सेवकों के कार्यों से इतिहास भरा पड़ा है जिन्होंने देश की उन्नति के लिये अपना सार जीवन लगा दिया। देशवासी उन्हें शत शत प्रणाम करते हैं। देश उनका सदैव ऋणी रहेगा।
मेरा गुलाब🌹उन शहीदों के लिये है
जिन्होंने देश के लिये जान दी..
उस दिन किस डे मनाया जा रहा था...
ऐ काश के लोग उन बच्चो के सिर को चूमते
जिनके सर पे हाथ फेरने वाला भी कोई नही
एक लड़की ने क्या खूब कहा है,
*मैं जब अपनी आँखें झुका कर चलती हुँ तो मेरे पिता और मेरा भाई सर उठा कर चलते है.....*
हम सब का परम कर्तव्य है कि अपने समाज मे प्रेम भाव से रहे एवं ईमानदारी से कार्यों का निरवाहन करें

✍ विकास भारद्वाज "सुदीप"
     खितौरा (बदायूँ)

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