हिंदी साहित्य वैभव

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रविवार, 5 मार्च 2017

12:27 am

वीरों को मेरा सलाम

विश्व में हर क्षेत्र मे देश का नेतृत्व करते है
हम भारत के युवा गुगल में भी कदम रखते है
पहन कफन सिर पे सीमा की रक्षा करते है
सो गये तिरंगा ओढ़ वीरों को नमन करते है।।

हमें वीरों तुम्हारे काम पर जरा भी शक नही है
औकात में रहे जो सेना से सबूत माँगते है
सरहद पर दुश्मन को मुँह तोड जवाब देते है
ऐसे भारत माता के वीरों को सलाम करते है।।

हर मिशन को अंजाम बडी खुद्दारी से देते है
सिने पे गोली खा कर जान नौछावर करते है
वतन के लिये जान निसार बार बार करते है
लौट के आना वीर सपूत हम इंतज़ार करते है।।

©विकास भारद्वाज "सुदीप"
मोबा.- 9627193400

12:25 am

●एक नयी सुबह●


सुबह मंदिर की घंटी आरती की थाली है
सुबह नदी के किनारे सूरज की लाली है
सुबह की ख्वाहिशें शाम तक टाली है,
कुछ इस तरह हमने जिंदगी संभाली है

शमा में इस वहम में सो गये हम परवाने
कहीं आम न हो जाए बात, नींद खोली है
चिडियों की फिजा में प्रेम मधुर वाणी है
उठते हुए सूरज से नजर मिलने वाली है
छुयेंगे आसमां को हम एक रोज देखना है
ये लहूलुहान परिंदे उड़ान जारी रखना है

सूरज की किरणों में हवाओं का बसेरा
खुले इस आसमान मे सूरज का चेहरा
नयी सोच नयी उम्मीद रोशनी लायी है
फिर से नये सपनों का सबेरा लायी है

©विकास भारद्वाज "सुदीप"
   03 मार्च 2017

12:23 am

इश्क में पागल दीवानी लडकी

लहरें मुहब्बत की तुम्हारे दिल से उठती हो
किसी के इश्क मे पागल दीवानी लगती हो
जिसको एक नजर निगाहो में देख लेती हो                          
कयामत तक उस दिल को होश नही देती हो

फिजाओं में तुम हो इन घटाओं में तुम हो
इन हवाओं में तुम हो इन बहारों में तुम हो
नर्म धूप में तुम हो पेडो की छाँव में तुम हो
मेरे डायरी के हर अल्फाज गजल में तुम हो

कश्मीरी बर्फीली हसीन सर्द रात सी तुम हो
शर्मीली आँखो से मासूम लडकी दिखती हो
जब भी पथ पर मुस्कराके इतराके चलती हो
उस बाग मे सुन्दर गुलाब की कली लगती हो

©कवि विकास भारद्वाज "सुदीप"
     9627193400
25 फरवरी 2017

12:21 am

नेह दिवस/पावन-प्रीत/देश-प्रेम/मातृ-पितृ दिवस

१४ फरवरी
विषय-

हर प्राणी अपनी जन्मभूमि से जुड़ा होता है। वह उससे अलग अपने अस्तिव को पूर्ण नहीं मानता। मनुष्य कहीं भी चला जाये, विदेशों में उसे कितनी ही सुख मिले, वह वापस अपने देश आना चाहता है। वह अपना देश, अपनी संस्कृति कभी नहीं भूलता।

मनुष्य की तरह ही पशु पक्षी भी अपनी प्रेम-पावन के स्नेह बंधन एवं आकर्षण में बंधे होते हैं। पक्षी या पशु सारा दिन दाना पानी की खोज में यहाँ वहाँ घूमते जरूर हैं, पर रात को पक्षी अपने घोंसलों और पशु अपने खूँटें पर पहुँच जाते हैं

इतिहास देशभक्तों के बलिदान की गाथाओं से भरा पड़ा है। सभी देशों में देशप्रेमियों को सम्मान और स्नेह मिलता है। हमारे देश के कवियों और साहित्यकारों ने शहीदों और देश पर मर मिटने वाले देशभक्तों की अमर गाथाओं को जी खोल कर लिखा है।
भारत ने इन्टरसेप्टर मिसाइल का सफल परीक्षण कर दुश्मन को प्रेम का संदेश दिया है,
देशभक्ति के उदाहरण केवल ये शहीद ही नहीं हैं। देश का नाम सारे विश्व में रोशन करने वाले वैज्ञानिक, खिलाड़ी, कवि और लेखक भी महान देशभक्तों की श्रेणी में आते हैं। ऐसे समाज सुधारकों, कलाकारों और समाज सेवकों के कार्यों से इतिहास भरा पड़ा है जिन्होंने देश की उन्नति के लिये अपना सार जीवन लगा दिया। देशवासी उन्हें शत शत प्रणाम करते हैं। देश उनका सदैव ऋणी रहेगा।
मेरा गुलाब🌹उन शहीदों के लिये है
जिन्होंने देश के लिये जान दी..
उस दिन किस डे मनाया जा रहा था...
ऐ काश के लोग उन बच्चो के सिर को चूमते
जिनके सर पे हाथ फेरने वाला भी कोई नही
एक लड़की ने क्या खूब कहा है,
*मैं जब अपनी आँखें झुका कर चलती हुँ तो मेरे पिता और मेरा भाई सर उठा कर चलते है.....*
हम सब का परम कर्तव्य है कि अपने समाज मे प्रेम भाव से रहे एवं ईमानदारी से कार्यों का निरवाहन करें

✍ विकास भारद्वाज "सुदीप"
     खितौरा (बदायूँ)

12:19 am

इस बार वोट देश निर्माण के लिए

68 वाँ गणतंत्र दिवस 26-जनवरी-2017

हम सब मिलकर इस बार चुनावी चोट देगें
जाति-धर्म को छोड देशहित के लिए वोट देगें
देश मे व्याप्त भ्रष्टाचार, कालाधन के खिलाफ
सरकार की कोशिश को हम सफल कर देगें।।

सोने के दिन गये अब तो चाँदी की रात है,
अब एक हजार के नोट की क्या ओकात है
अब सरकार से गरीबो,बेरोजगारों को आस है
यही भारतीय किसान की जन-धन पुकार है ।।

आधुनिक युग  में सपना युवा-चरम सफलता का हैं , 
विश्व में सत्यम शिवम सुंदरम ने कर दिखलाया है
इसरो ने फिर अन्तरिक्ष में तिरंगा झण्डा फहराया हैं,
पृथ्वी, मंगलयान भेज भारत का मान बढाया है ।।

जो दिक्कत होगी नोटबन्दी से हम गरीब झेल लेगें,
हम परेशानी उठा देशहित मे सरकार का साथ देगें ।
कालेधन वालो को हम सोचने पर मजबूर कर देगें,
कैशलेश का जमाना आया अब पेटीएम हम कर देगें ।।

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,  हर हिन्दुस्तानी ,
भारत को फिर विश्व गुरू के पद पे बैठा देगें
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्य
बना हम देखना विश्व इतिहास दर्ज करा देगें ।।

मिले भारतीय सेना को फिर एक बार छूट ,
जवान युद्ध मैदान में तिरंगा झण्डा लहरा देगें ।
भारत के कश्मीर पर फिर से हमला करने वाले,
अबकी बार पाक तेरा नाम-ए-निशान मिटा देगें ।।
©विकास भारद्वाज "सुदीप"
9627193400               22-जनवरी-2017
12:15 am

गीत गजल के सुर की जान तिरंगा

हर घर मे देशभक्ति की अलख जगाना है
वतन पर लहू का हर कतरा बहाना है ।
अब सबको एक द्रढ-संकल्प लेना है
भ्रस्टाचार को हिन्दूस्तान से मिटाना है ।।

इस बार मतदान से अच्छा नेता लाना है
कोई अच्छा ना लगे,नोटा का बटन दबाना है।
देश के गद्दरो पर चोट कर मुल्क बचाना है
कुछ कर भारत का विश्व मे सम्मान बढ़ाना है

देश के वीर जवानो ने कफन तिरंगा बनाया है
इस तिरंगे की शान पर पल-पल मर जाना है।
चट्टानो से अडिग हौसलें सबको बनाना है
गीत गजल के सुर की जान तिरंगा बनाना है

©विकास भारद्वाज "सुदीप"
Mob.-9627193400
26 जनवरी 2017

12:13 am

मेरे हिन्द देश की संस्कृति

हम भारतीय अपनी संस्कृति से बेहद लगाब रखते है
भारत के उत्तरी कोने से दक्षिणी कोने तक भ्रमण करें तो निस्संदेह भिन्नताओं को देखते हुए यह विश्वास करना कठिन हो जाता है कि ये सब भारत के ही भू भाग हैं । यहाँ का धरातल कहीं पर्वतीय है तो कहीं सपाट, कहीं घने जंगल हैं तो कहीं पठार । भाषा की विविधता भी यहाँ देखने को मिलती है । कुछ प्रदेशों में हिंदी भाषी लोग अधिक हैं तो कुछ में अवधी या फिर मराठी भाषा प्रधान है ।

केवल अशिक्षित ही नहीं अपितु हमारे कथित सभ्य-शिक्षित समाज में भी दहेज का जहर व्याप्त है । प्रतिदिन कितनी ही भारतीय नारियाँ दहेज प्रथा के कारण मनुष्य की बर्बरता का शिकार हो जाती हैं अथवा जिंदा जला दी जाती हैं ।

अंधविश्वास व रूढ़िवादिता जैसी सामाजिक बुराई देश की प्रगति को पीछे धकेल देती है । अंधविश्वास व रूढ़िवादिता हमारे नवयुवकों को भाग्यवादिता की ओर ले जाती है फलस्वरूप वे कर्महीन हो जाते हैं । अपनी असफलताओं में अपनी कमियों को ढूँढ़ने के बजाय वे इसे भाग्य की परिणति का रूप दे देते हैं ।

भ्रष्टाचार भी हमारे देश में एक जटिल समस्या का रूप ले चुका है । सामान्य कर्मचारी से लेकर ऊँचे-ऊँचे पदों पर आसीन अधिकारी तक सभी भ्रष्टाचार के पर्याय बन गए हैं। जिस देश के नेतागण भ्रष्टाचार में डूबे हुए होंगे तो सामान्य व्यक्ति उससे परे कब तक रह सकता है । यह भ्रष्टाचार का ही परिणाम है कि देश में महँगाई तथा कालाबाजारी के जहर का स्वच्छंद रूप से विस्तार हो रहा है ।

हमें ईमानदारी एवं कर्म निष्ठा से कार्य का निरवाहन करना चाहिए सामाजिक कार्यो मे भी सहयोग करना हमारा कर्तव्य है

12:10 am

पहाडो की रानी : नदी

सदियों से पहाडो के बीच बहती हुई,
शांत, सहनशील नदी के सुन्दर नजारे ।
दूर आसमां में छटा बिखेरता चाँद,
फिजा का प्यारा सुहावना रंगीन मौसम ।।
आसमान में टिके हुये चाँद-सितारे,
उस पर सफ़ेद बादलों के नजारे ।
बगुला रखता मछली पर ध्यान,
मनमोहक सा फुहार का मौसम ।।
चहचहाती चिडियाँ,फूलों पर तितली रानी,
मेढक-टिड्डे उछले,बोले कोयल मधुर बाणी ।
चंचल-ए-ठण्डी हवाऐं दिल छू जाये,
खुबसूरत झरना सबके मन को भाये ।।
नदी पर पनहारिन की बातें,पनघट के किनारे,
सुहाने मौसम की सौगातें,झरने के पुरनूर धारे।
काश...तुम साथ होती नदी के किनारे,
साथ बैठ करते मस्ती नदी के किनारे ।।

©विकास भारद्वाज "सुदीप"
8/01/2017 Sunday

रविवार, 15 जनवरी 2017

6:12 am

♡ अदभुत एहसासों के मोती ♡

जो बिखरे तो फ़िर मुद्दतों बिखरे ही रहे हम,
माला के वो अदभुत मोती,मिले ही नही हमें  ।
दिल की हकीकत के मोतीयों से बने हुए है हम, 
उसके रूखसार पे तिल देख फिदा हुए है हम।।
उसकी कातिल नजरों से घायल होने लगे हम,
चाँद से चेहरे से महफिल में गजब नूर ढहा रहे है ।
रातों में ख्वाबों की दुनिया में हक़ीक़त सी निराली है,
सुना है प्यार की वो खूश्बू अजब सी नियारी  है ।।
मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम
एक दूसरे की याद में अब रोया करेंगे हम ।
आँखो में आंसू छलक सतायेंगे रात भर,
एहसासों के मोती पलक पे पिरोया करेंगे हम ।।
अर्णव=दरिया
©विकास भारद्वाज "सुदीप"
9627193400                  14/01/2017

मंगलवार, 20 दिसंबर 2016

6:22 am

उसकी जुल्फो में एक शाम

जब मेरे खत पढ किताब मे रख कुछ होंटो पर गुनगुना रही थी,
सोचकर रातों को यादो मे सुन्दर सपने सजा रही थी ।
छत पर बैठी मेरा ज़िक्र कर,मुस्कुरा रही थी
ये हिचकी शाम से, यूँ ही तो नहीं आ रही थी ।।
दीवार-ए-आईना मे जुल्फो को हटा रही थी,
माँ से नजर बचाकर मुझसे मिलने आ रही थी ।
मेरे सामने वो बैठकर नजरें छुपा रही थी,
हम जानते थे कि रस्म-ए-उल्फ़त भी यूँ निभा रही थी ।।
उसके रूखसार पे तिल भी गजब ढा रहा था,
आँखो में काजल लगाकर मुझपर नजरो से पिलायें रही थी ।
उसकी आँखो में देखता रहा मैं और सुबह से सहर हो गयी,
फिर शाम को अपनी गली में मुझे खिडकी से देख रही थी ।।
ऐसी लडकी थी उसकी जुल्फो मे शबनम शाम थी,
जब गाँव लौटे तो मालुम पडा मोहब्बत किसी गैर की हो गयी ।
अचानक रास्ते मे मिली नजरे फेर ली उसने,
आज उसकी याद विकास दिले-नाशाद कर रही थी ।।

गुरुवार, 15 सितंबर 2016

6:25 am

एक पल का उसका दीदार-ए-हसरत

मुझे खिडकी से देखने का इंतजार कर रही थी,
यूँ इशारो मे वो दीवारो से बात कर रही थी ।
कभी मेरी यादों के ख्यालों में खोने लगी,
कभी मेरी फोटो को छुपके से निहार रही थी ।।
खत मेरे नाम लिख किताबो मे छुपाने लगी,
खत की गुलाब-ए-ख़ुशबू📃ये बता रही थी।
लिखते हुए उसके चाँद से चेहरे पर जुल्फे खुल रही थी,
आँखों मे आँसुओं की सैलाबे-गम दिख रही थी।।
प्यार की खुश्बू उसकी सांसो से आ रही थी,
चेहरे पर शोरे निशूर* देख मेरी धड़कन बडती जा रही थी।
उस दिन वो सुर्ख़ लाल जोडे में बहुत सुंन्दर लग रही थी,
मगर विकास पहली बार वो किसी और की लग रही थी ।।
शोरे निशूर= कयामत के दिन का शोर
©विकास भारद्वाज "सुदीप"

गुरुवार, 28 जुलाई 2016

7:20 am

माता-पिता ही मेरे फरिश्ते

सबक जिंदगी के पल पल सीख रहा हूँ,
माँ मै मंजिल-ए-तमन्नाओ के साथ बड रहा हूँ
जिंदगी के जिन रास्ते पर तलवे मेरे छिल रहे है,
कभी उसी रास्ते पर पिताजी कईयों मील चले थे ।।
तुम जिसे अपने प्यार के पिंजरे मे फँसा बैठी हो,
वो किसी माँ-बाप की उम्मीदों का सहारा होगा ।
मैं अपनी माँ की आँखो का तारा रहा हूँ ,
उनके आँख में आँसू आते ही मेरा अस्तित्व समाप्त होगा ।।
माता-पिता में बस रहें , साक्षात भगवान ।
मन्दिर-मस्जिद ढूँढता , मानव है नादान ।।
बिखरे-बिखरे सपने हुए ,तार-तार विश्वास ।
माँ-बाप को बेटो ने घर से करा दिया वनवास ।।
आजकल देखो घर बँटते नही है, सीधा नये बन जाते है ।
बेकार वस्तुये और माँ-बाप, पुराने घर में रह जाते है ।।
सदा चलेगें जिस पर अपने, मेरे न रहने के बाद ।
अभी विकास इन कदमों से, वो रास्ता बनाना है।।

विशिष्ट पोस्ट

सूचना :- रचनायें आमंत्रित हैं

प्रिय साहित्यकार मित्रों , आप अपनी रचनाएँ हमारे व्हाट्सएप नंबर 9627193400 पर न भेजकर ईमेल- Aksbadauni@gmail.com पर  भेजें.